यही दुआ है मेरी .......

प्रतीक की डायरी से .....

From the Diary of Pratik .........


नमस्कार पाठकों !

अपने चिट्ठे स्वप्निल सौंदर्य के माध्यम से आज मैं आप सभी पाठकों का परिचय करा रही हूँ श्री कुमार प्रतीक जी से. अपने इस ब्लॉग पर उनकी डायरी के कुछ अनमोल पन्नों व उनकी रचनाओं को जगह दे कर मन हर्षोल्लास से भर उठा है क्योंकि इनकी रचनाओं व विचारों में काफी मौलिकता है , पवित्रता है , खूबसूरती है व बेहद मासूमियत है .
जैसे कि इस ब्लॉग का उद्देश्य एक ऐसी सुंदर दुनिया का निर्माण करना है जो आपके सपनों की दुनिया सी हो . जिसके जरिये आप अपने सपनों को हकीकत में तबदील कर सकें. फिर जब बात प्यार , मोहब्बत की हो तो हर किसी का सपना होता है कि उसके जीवन में उसके साथ एक ऐसा हमसफर हो जो जीवन पथ पर उसका साथ निभाता रहे. प्यार, मोहब्बत व साहित्य के बीच  हमेशा से ही एक खूबसूरत संबंध रहा है . इसी कड़ी में श्री प्रतीक कुमार जी के द्वारा रचित एक कविता को आप सबके साथ बाँट रही हूँ . उम्मीद है मेरे अन्य ब्लॉग्स  की तरह ही 'स्वप्निल सौंदर्य' के साथ जुड़ने जा रही इस नई  कड़ी के साथ् भी आप सभी पाठक जुड़ेंगे और अपने प्रेम और आशीर्वाद की वर्षा करेंगे. इसी आशा के साथ प्रस्तुत है प्रतीक की डायरी से  'यही दुआ है मेरी '...........







यही दुआ है मेरी ....................
 
 


क अजनबी एक शहर में,

ढ़ूंढ रहा अपनी मंज़िल,

कहाँ जाए, किधर जाए

सोच रहा उसका वो दिल,

ठान लिया उसने कि जाना है

मंज़िल तक,

कमी थी उसको कोई साथ नहीं उसके,

दिल में थी कसक पर बता

ना सका किसी को ,

दूर कोई कर रहा था फरियाद उस

अजनबी के लिए,

वो ठीक रहे , अच्छा रहे

आशा है यही दिल से,

दिन निकलते गए तन्हाइयाँ बढ़ती गईं

कमी बस उस शख्स की  उसको

खलती गई,

एक रोज़ उसने आवाज़ सुनी

उस इंसान की

खिल उठा जीवन उसका

चेहरे पे आयी मुस्कान सी,

प्यार जिससे किया उसने साथ न छोड़ा,

अजनबी शहर में भी

उसे अकेले न छोड़ा,

एहसास दिलाया उसने

मैं तेरे साथ हूँ,

तू जहाँ जाएगा मुझे पाएगा ,

मत सोचना कि तू अकेला है

तेरी तन्हाइयों को दूए करने मैं

आई हूँ,

तू बेफिक्र कर अपनी मँज़िल

की तलाश

तेरे हर कदम पर

मैं तेरे साथ हूँ

एक बार याद करना दिल से

तू मुझे पाएगा

तेरे अश्क हैं मेरे लिए

मोतियों की तरह,

इन्हें मत बहाना ऐसे पानी की तरह ,

रहो खुश हमेशा

यही दुआ है मेरी,

सारी खुशियों को पा लो यही

दुआ है मेरी ,

तेरे लिये कुर्बान हर

खुशियाँ हैं मेरी

रहो खुश हमेशा यही दुआ है मेरी,

यही दुआ है मेरी .



                - कुमार प्रतीक 







कुमार प्रतीक के बारे में :

" नाम है जिनका 'कुमार प्रतीक' ,
रचनायें होती हैं जिनकी, बेहद सटीक.
इतनी सरल, सहज , खूबसूरत अभिव्यक्ति ,
कर सकते हैं ये ही व्यक्ति. "

               


 


एम. बी. ए. डिग्री होल्डर ' प्रतीक ' की ज़िंदगी अधिकतर कॉर्परट (Corporate ) जगत के इर्द- गिर्द ही घूमती रहती है. फिर भी इस भाग- दौड़ भरी ज़िंदगी में भी उन्होंने अपने लेखन के शौक़ को पंख दिए हैं. इनकी रचनाएं ज़िंदगी की सत्यता, तन्हाई व श्रृंगार रस पर केन्द्रित हैं.


Presented and Posted By :

- Swapnil Shukla


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Comments

  1. well done. very well written and presented . congrats swapnil .
    Mr. pratik u r too gud . keep maintain this talent . best wishes.


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  2. नीरज राजपूत21 March 2013 at 06:14

    सुंदर शब्दों में पिरोई गई सुंदर रचना. बधाई प्रतीक जी .
    स्वप्निल जी आपका आभार ऐसी सुंदर रचना को हमारे समक्ष प्रस्तुतु करने के लिए.
    - नीरज राजपूत

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  3. विजय प्रकाश विश्वकर्मा21 March 2013 at 06:14

    "तेरे अश्क हैं मेरे लिए
    मोतियों की तरह,
    इन्हें मत बहाना ऐसे पानी की तरह ,
    रहो खुश हमेशा
    यही दुआ है मेरी"


    बेहद खूबसूरत पंक्तियाँ व भाव . बधाई

    - विजय प्रकाश विश्वकर्मा

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  4. तन्हाइयों में भी किसी अपने के साथ होने का अहसास .......बहुत उमदा
    प्रतीक की दायरी से ...... पाठकों के समक्ष कुछ नया प्रस्तुत करने का सार्थक प्रयास.

    - अनुराधा शर्मा

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  5. very nice poem . emotional and captivating!!!!!!!!!
    good work swapnil ji . again u presented the talent of a person on your blog . u r undoubtedly a real artist and writer because you give respect to the art and talents of others . keep maintain this . congra8
    + good job pratik !

    - Bimal Jeet

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  6. डॉ . कृ्ष्ण सिंह21 March 2013 at 06:19

    " एहसास दिलाया उसने
    मैं तेरे साथ हूँ,
    तू जहाँ जाएगा मुझे पाएगा ,
    मत सोचना कि तू अकेला है
    तेरी तन्हाइयों को दूए करने मैं
    आई हूँ,
    तू बेफिकर कर अपनी मँज़िल
    की तलाश
    तेरे हर कदम पर
    मैं तेरे साथ हूँ "

    उत्कृ्ष्ट भाव ..... अत्यंत प्रभावशाली कविता . बधाई प्रतीक साहब .
    आभार स्वप्निल जी!

    डॉ . कृ्ष्ण सिंह .

    ReplyDelete
  7. रवि त्रिवेदी21 March 2013 at 06:26

    वाह !!!!!! क्या खूब . आभार प्रतीक जी व स्वप्निल जी को .
    - रवि त्रिवेदी .

    ReplyDelete
  8. प्रेम शंकर21 March 2013 at 06:31

    " सारी खुशियों को पा लो यही
    दुआ है मेरी ,
    तेरे लिये कुर्बान हर
    खुशियाँ हैं मेरी
    रहो खुश हमेशा यही दुआ है मेरी,
    यही दुआ है मेरी ."

    सच्चे प्रेम की सटीक परिभाषा को उजागर करती कविता ... बहुत सुंदर भाव .
    चित्रांकन व प्रस्तुतिकरण बेहद सराहनीय . आभार स्वप्निल जी व प्रतीक भाई !
    - प्रेम शंकर

    ReplyDelete
  9. बहुत बढि़या प्रस्तुति . काबिले तारीफ चिट्ठा . बधाई स्वप्निल जी .
    नि: संदेह प्रतीक जी एक अच्छे कवि हैं .. तभी आपने उन्हें अपने चिट्ठे पर स्थान दिया, इसके लिये आपको धन्यवाद कि आपने ऐसी अच्छे साहित्य का हम पाठकों के साथ परिचय कराया. बढ़िया कलात्मक चित्रण !

    - रुबी.

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  10. अमित मलिक21 March 2013 at 06:32

    इस कविता ने वाकई मुझे मेरे पहले प्यार की याद दिला दी. वो पहला प्यार .... स्कूल डेस का प्यार ... मैं जिस लड़की के प्रेम में गिरफ्तार था ..उसके लिये मेरी भी ऐसी ही भावना थी.... आज हम सच्चे जीवन साथी है .... लेकिन अपनी इस प्यार को कभी पन्ने पर इस खूबसूरती से नहीं उतार पाया. श्री कुमार प्रतीक जी को बहुत - बहुत आभार ... और स्वप्निल जी आपको शुभकामनायें . प्रस्तुतिकरण लाजवाब है..................

    - अमित मलिक , दिल्ली

    ReplyDelete
  11. दीपिका अग्रवाल21 March 2013 at 06:39

    स्वप्निल सौंदर्य एक ऐसी जगह बनती जा रही है जो असल में सपनों की दुनिया जैसी है .. जैसे कोई सपने ने यथार्त का रुप ले लिया हो . यहाँ हर वर्ग के लोगों के लिये , हर प्रकार की लाभदायक वस्तुएं व जानकारियाँ उपलब्ध हैं.
    स्वप्निल जी आपकी ही तरह आपका ब्लॉग भी बेपनाह खूबसूरती की मिसाल है . शुभकामनाये .

    - दीपिका अग्रवाल

    ReplyDelete
  12. प्यार जैसे खूबसूरत एहसास को इतनी खूबसूरती से बयाँ किया गया है जिसकी तारीफ में शब्द कम पड़ जाएंगे .
    कबिता के साथ - साथ लाजवाब चित्रकारी .
    - अरुण .

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  13. कल्पना मुखर्जी21 March 2013 at 06:45

    स्वप्निल सौंदर्य ब्लॉग की यही तो विशेषता है कि यहाँ हर चीज़ टॉप क्लास देखने को मिलती है . चाहे बात कंटेट की हो या चित्रांकन की या प्रस्तुतिकरण . बहुत सुंदर .
    - कल्पना मुखर्जी

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  14. समीर कुमार21 March 2013 at 06:48

    इतनी सुंदरता एक जगह पर अचंभित कर देती है स्वप्निल जी . कवि प्रतीक जी को बधाई . कविता बेहद खूबसूरत है . शब्दों में बेह्द पाकीज़गी है . बधाई

    - समीर कुमार

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  15. मिनाक्षी द्त्ता .21 March 2013 at 06:48

    ऐसे साथी की तो कर किसीए को तलाश रहती है . ऐसे ही साथी सच्चे जीवन साथी कहलाते हैं जो पग- पग पर आपका हौसला बढाते हैं ... आपकी ताकत बन जाते हैं... सरल शब्दों में सुंदर अभिव्यक्ति .
    चित्र बेहद प्रशंसनीय है ... सुंदरता का दूसरा नाम स्वप्निल सौंदर्य .
    - मिनाक्षी द्त्ता .

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  16. वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति
    बधाई आपके संयोजन के लिये----
    aagrah hai mere blog
    jyoti-khare.blogspot.in main
    sammlit hon

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  17. Swapnil,

    Again its a beautiful presentation where words explain the mood and emotions of the drawings and drawings showing the feel of words...!!!
    Nice job by you and Pratik

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  18. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 23/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  19. शानदार प्रस्तुति ....शब्दों में गहराई भी झलकती है ...बहुत खूब

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  20. सुंदर प्यार भरी रचना । फ्रतीक जी और आप का अभिनन्दन ।

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