Life of an Artist




Life of an Artist .



Art of Vivek .




नमस्कार पाठकों !

ला ईश्वर के द्वारा निर्मित एक बहूमूल्य वस्तु
नहीं ...... बल्कि  कला ईश्वर के द्वारा हम प्राणियों को दिखाया गया एक रास्ता है जिसके द्वारा हम अपनी ज़िंदगी को प्रसन्नता व खूबसूरती से लैस कर सकते हैं. कला एक शक्ति है खुद को जानने व पहचानने की , एक सशक्त माध्यम है खुद के विचारों को औरों तक पहुँचाने के लिए  .... लोगों को जागरुक करने के लिए और यदि मैं, अपनी बात करुँ तो मेरा मानना यह है कि कला एक भाषा है जिसके द्वारा हम अपनी भावनाओं , अपनी इच्छाओं को व्यक्त कर सकते हैं .... कला के द्वारा हम दूसरों की भावनाओं और स्थिति को भी दर्शा पाने में सक्षम हो पाते हैं .... इस दुनिया में विभिन्न धर्म हैं .... विभिन्न संस्कृ्तियाँ व परंपरायें हैं.... विभिन्न भाषायें हैं....... लेकिन इन विभिन्नताओं में कला की भाषा सामान्य है और वो भाषा है भावनाओं की भाषा जो हर किसी को समझ में आती है .

आज अपने ब्लॉग ' स्वप्निल सौंदर्य ' पर आप सभी का साक्षात्कार एक ऐसी शख्सियत से कराने जा रहीं हूँ जिनके सिर पर माँ सरस्वती का साक्षात हाथ है ...जिन्हें ईश्वर की तरफ से वरदान के रुप में चित्रकला का गुण प्राप्त है .....कला के क्षेत्र में बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के बावजूद इनकी चित्रकला अत्यंत मनमोहक व अतुल्य है ........... मैं बात कर रही हूँ अपने स्कूल डेस के मित्र 'श्री विवेक श्रीवास्तव जी ' की .

'विवेक ' मानते हैं कि बिना रचनात्मकता के कला जीवित नहीं रह सकती क्योंकि रचनात्मकता और मौलिकता ऐसे प्रमुख गुण हैं , जिनसे कला निखरती है. 


विवेक अपनी पेंटिंग्स में इन्हीं गुणों को शामिल करते हुए अक्सर नए - नए प्रयोग करते रहते हैं. विवेक के अनुसार आज एक्स्पेरिमेंट्स का दौर है. आज  पेंटिंग्स सिर्फ कैनव़स तक ही सीमित नहीं है. कला का क्षेत्र दिनों दिन व्यापक रुप लेता जा रहा है.

विवेक की चित्रकला अदभुत है ..... इनकी चित्रकलाओं में आश्चर्यचकित कर देने वाली खूबसूरती व बारीकी साफ तौर पर देखी जा सकती है . इनके द्वारा बनाई गई हर पेंटिंग को देख ऐसा महसूस होता है कि मानो कलात्मक विचारों से जन्मीं इनकी चित्रकला संपूर्ण होते ही कैनव़स या पन्ने के दाय्ररों को पार करती हुई आपके समक्ष जीवंत हो उठेगी ..... सीधे शब्दों में कहा जाए तो कलात्मकता व रचनात्मकता को सजीवता प्रदान करने की शक्ति है विवेक के हाथों में .

विवेक एक सच्चे कलाकार हैं. कहा जाता है कि एक कलाकार का व्यक्तित्व बेहद स्वतंत्र व बेबाक होता है . विवेक भी ऐसे ही हैं.... गंभीर व्यक्तित्व , स्वतंत्र विचार , थोड़े मूडी और ज़िंदगी को अपने अंदाज़ में जीने वाले विवेक एक सच्चे मित्र होने के नाते मेरे हर एक कार्य के प्रशंसक है ......


 आप सभी पाठकों के साथ एक मज़ेदार बात बाँटना चाहूँगी..... असल में मुझे और मेरे भाई ऋषभ को भी ईश्वर की कृ्पा से चित्रकला का गुण वरदान स्वरुप प्राप्त है और हम दोनों भी सच्चे कलाकार हैं पर जैसा कि हम सभी जानते हैं कि एक सिक्के के दो पहलू होते हैं वैसे ही जहाँ विवेक एक गंभीर, शांत एवं सहयोगी स्वाभाव के कलाकार हैं वहीं मैं और मेरे भाई ऋषभ हठी , ज़िद्दी और थोड़े से ईर्ष्यालु स्वभाव के कलाकार हैं.... कहने का तात्पर्य यह है कि स्कूल डेस में हमारा स्वभाव कुछ ऐसा था कि यदि किसी भी कार्य में हमसे कोई बेहतर होता तो भीतर ही भीतर हम थोड़े ईर्ष्यालु हो जाया करते थे.....खैर, उस वक़्त बचपना भी था .... अब समझ आ गई है तो ये खराब आदत में भी परिवर्तन आ गया है . पर जब विद्यालय के दिनों में एक बार एक आर्ट कॉमपटिशन में मैंने, ऋषभ, विवेक और कुछ अन्य बच्चों ने पार्टिसिपेट किया तो कहीं न कहीं हमें पता था कि इस प्रतिस्पर्धा में या तो सिर्फ मैं जीतूंगी या मेरा भाई ऋषभ ...... हमारी कला विषय की शिक्षिका को भी हम पर पूर्ण विश्वास था ...तब मुझे और ऋषभ को इस बारे में भनक भी नहीं थी कि विवेक चित्रकला में हमें कड़ी टक्कर देने वाले हैं.......... आर्ट कॉमपटिशन् हमारे विद्यालय में न होकर अन्य विद्यालय परिसर में था .... हम वहाँ पहुँचे ... आर्ट कॉमपटिशन का विषय था ' जनसंख्या वृ्द्धि ' ... और समय अवधि थी 'एक घंटा' और जैसे कि मुझे अनुमान था कि आर्ट कॉमपटिशन् का विषय और इतनी कम समयावधि सुनते ही आधे से ज्यादा बच्चे हिम्मत तोड़ देंगे और हुआ भी कुछ ऐसा ही ...इस पर मैं और मेरा भाई ऋषभ एक दूसरे की ओर देख मंद -मंद मुस्कुरा रहे थे. जैसे ही निरीक्षक ने हमें शीट प्रदान कि हमने अपने बगल में देखा तो विवेक जी ने शीट मिलते ही फटाफट - खटाखट स्कैचिंग करनी शुरु कर दी.... मैंने और ऋषभ ने एक दूसरे से धीरे से कहा, "देखो, कितनी ओवर स्मार्टनेस दिखा रहे हैं.... जैसे ये कॉमपटिशन ये ही जीत जाएंगे " और विवेक को इरिटेट करने के लिये मुँह चिढ़ाते हुए अपना कार्य करने लगे .... विवेक ने मेरी और ऋषभ की ये बचकानी हरकतें देख तो ली थीं पर विवेक बहुत समझदार और गंभीर स्वभाव के थे तो उन्होंने हँसते हुए टाल दिया . उसके बाद विवेक ने तो जल्दी- जल्दी बहुत ही सुंदर चित्र जनसंख्या पर बना भी लिया और उसमें रंग भी भरना शुरु कर दिया और मैं तो विवेक की पेंटिंग कंपलीट भी होने वाली है , यह  देख हड़्बड़ाहट के चलते निश्चित जगह पर गलत रंग भरने लगी ...... ऋषभ ने जब मुझे गलत रंग भरता देखा तो उसने कहा, "अरे स्वप्निल दीदी ! यहाँ ये रंग नहीं होगा "......ऋषभ के कहने पर जब मैंने गौर किया तो मैंने पाया कि हाँ मैंने तो हड़्बड़ाहट में गलत रंग भर दिए ...फिर मैंने ऋषभ से कहा कि, "अरे ऋषभ मेरी छोड़ो विवेक की पेंटिंग देखो कितना अच्छा बना लिया इन्होंने"  ..... ऋषभ ने मुझसे कहा कि, "हम दोनों से बेहतर कोई बना पाया है आज तक ...चित्रकला में तो हम दोनों ही उस्ताद है".... यह कहते हुए मेरे प्यारे भइया ने अपनी पेंटिंग बनाते- बनाते पीछे विवेक की पेंटिंग देखी और बस ऋषभ भी मेरी ही तरह ईर्ष्या की अग्नि में जल उठा ......हम दोनों भाई- बहन विवेक को देखे जा रहे थे तब तक विवेक ने थोड़ा मुस्कुराते हुए हमसे कहा, "क्या हुआ मेरा चित्र तो कंपलीट हो गया है... मैं आप लोगों की हेल्प कर देता हूँ" और बस विवेक के ये कहते ही हम दोनों और तिलमिला गए .....ऋषभ ने बड़े ही खीजते हुए विवेक से कहा, " जी नहीं! हमें आपकी हेल्प  की कोई जरुरत नहीं "...... और ऋषभ की इस बात पे मैंने उससे कहा, "बहुत सही ऋषभ ! बहुत सही ! "....... और हम लोग वापस अपना काम करने लग गए...... हमारे इस घमंडी ऎटीट्यूड को देख विवेक बस " अरे !!! " कह कर रह गए ...... खैर, एक घंटा बीत गया पर उस दिन न मेरी पेंटिंग पूरी हुई और  न ही ऋषभ की और हुआ वही जिसकी हमें उम्मीद न थी कि वो आर्ट कॉमपटिशन में पहला पुरस्कार जीता श्री विवेक श्रीवास्तव जी ने ........
खैर, वो बचपने की बातें थी ..... जब हममें समझ आई तो हमें अहसास हुआ कि हम दोनों गलत थे ..... विवेक तो सच्चे हृ्दय से हमारी मदद ही कर रहे थे ..... आज भी कभी जब वो वाक्या मुझे या ऋषभ को याद आता है तो हम लोगों को बहुत हँसी आती है ............

विवेक की चित्रकला बेहद सराहनीय है.... इनके द्वारा बनाई गई हर कलाकृ्ति देख मन-मस्तिष्क प्रसन्नता से भर उठता है ....... तो आइये 'स्वप्निल सौंदर्य' के ज़रिये चलते हैं 'श्री विवेक जी' द्वारा रचित एक कलात्मक दुनिया में जहाँ आप और हम सभी पाठक रंग जाएं एक कलात्मक परिवेश में. 














 
                                         - विवेक श्रीवास्तव




विवेक के बारे में :

"हाथों में जिनके, कला का जादू, कुछ इस कदर बोले ,
कि हर कलाकृ्ति में जैसे वो  जीवंतता को घोलें ,
कला है इनकी इतनी हसीन,       

                                      मानो गीली मिट्टी की सौंधी सी खुशबू,
                                           वो बारिश के मौसम की पहली बूँद, 

                      दिलो दिमाग में शीतलता कुछ इस कदर छा जाए ,
    कि सुंदरता का पर्याय बस 'विवेक' की चित्रकला ही बन जाए ."


 

पेशे से आई.सी.एस ऎप्लिकेशन स्पेशलिस्ट और हृदय से चित्रकार विवेक का मानना है कि मनुष्य के अनुभवों और रचनात्मकता के संगम से कला का जन्म होता है. चित्रकला के क्षेत्र में पॉरट्रेटस {Portraits} के अलावा विवेक को लैंडस्केप { Landscape }, स्टिल लाइफ़ {Still life } आदि  में भी विशेष महारथ प्राप्त है.










Presented and Posted By :


         - स्वप्निल शुक्ल



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Comments

  1. डॉ . कृ्ष्ण सिंह1 April 2013 at 02:02

    उत्कृ्ष्ट लेख ......बहुत सुंदर कला.
    आभार स्वप्निल व विवेक जी !

    - डॉ . कृ्ष्ण सिंह

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  2. well done Vivek. Bro. you are too good ! congrats swapnil ji.

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  3. shrishti Prabhu1 April 2013 at 02:03

    I never saw such mesmerizing art . the artist has used only shading pencils on a paper and the result is fabulous . omg! its miraculous art .
    - shrishti Prabhu

    ReplyDelete
  4. कौशल सिंह1 April 2013 at 02:03

    बहुत उमदा ...... पाठकों के समक्ष कुछ नया प्रस्तुत करने का सार्थक प्रयास. आप दोनों को बधाई .
    -कौशल सिंह

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  5. Mudita Awasthi1 April 2013 at 02:06

    very nice !!!!! captivating sketches !!!!!
    good work swapnil ji .
    best wishes to vivek ji.

    - Mudita Awasthi

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  6. नीरज राजपूत1 April 2013 at 02:10

    सुंदर शब्दों में पिरोया गया लेख . स्कूल डेस वाला वाक्या पढ़ अपने बाल जीवन की याद आ गई . बहुत सुंदर चित्र बनायें है विवेक जी ने .
    स्वप्निल जी आपका आभार ऐसे हुनरमंद लोगों को हमारे समक्ष प्रस्तुतु करने के लिए.
    - नीरज राजपूत

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  7. अर्पिता जैन1 April 2013 at 02:13

    वाह ! क्या खूब .
    - अर्पिता जैन

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  8. अनुज बाजपई1 April 2013 at 02:14

    बेहद सराहनीय चित्रकला . आभार स्वप्निल जी व विवेक जी!
    - अनुज बाजपई

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  9. रुपल तोमर1 April 2013 at 02:15

    एक बार पुन: आपने एक नई शख्सियत से हमारा परिचय कराया . बहुत खूब स्वप्निल . विवेक जी की कला काबिले तारीफ है . एक- एक चित्र जैसे अभी बोल पड़ेगा .शुभकामनाओं सहित,
    - रुपल तोमर

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  10. अमित मलिक1 April 2013 at 02:16

    विवेक जी द्वारा पन्नों पर बड़ी ही खूबसूरती से बनाई गई लाजवाब चित्रकारी ... इतनी बारीकी इससे पहले कभी नहीं देखी . एक - एक चित्र को बनाने में बहुत मेहनत की गई है . वाह ! बहुत अच्छे !!
    स्वप्निल जी आपको आभार


    अमित मलिक

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  11. सुनीता चौधरी1 April 2013 at 02:17

    स्वप्निल जी आपके इस चिट्ठे की और विवेक जी की पेंटिंग्स की तारीफ में तो शब्द कम पड़ जाएंगे .
    - सुनीता चौधरी

    ReplyDelete
  12. विजय प्रकाश विश्व्कर्मा1 April 2013 at 02:18

    आभार स्वप्निल जी इस पोस्ट को अपने ब्लॉग पर जगह देने के लिए.
    - विजय प्रकाश विश्व्कर्मा

    ReplyDelete
  13. Awesome post . thanks Swapnil for sharing the art of Mr. Vivek.

    - Roshani Gupta

    ReplyDelete
  14. मिनाक्षी द्त्ता1 April 2013 at 02:24

    बेहद प्रशंसनीय चित्रकारी ... सुंदरता का दूसरा नाम स्वप्निल सौंदर्य .
    - मिनाक्षी द्त्ता .

    ReplyDelete
  15. "JUST FANTASTIC "

    - Gaurav Singh

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  16. मीरा सिंह1 April 2013 at 02:32

    ऐसा हुनर हर किसी के पास नहीं होता . सचमुच गजब की चित्रकारी करते हैं आप विवेक भाई . इस क्षेत्र में आपका भविष्य नि:संदेह उज्ज्वल है . बधाई
    -मीरा सिंह

    ReplyDelete
  17. मनोज शुक्ला1 April 2013 at 02:35

    स्वप्निल जी, आप खुद भी एक गुणवान महिला हैं. और दूसरों की कलाओं को सम्मान देना बखूबी जानती हैं . आपको नमन .
    विवेक जी वाकई सच्चे कलाकार हैं. शुभकामनाऔं सहित
    -मनोज शुक्ला

    ReplyDelete
  18. डॉ . विमला ठाकुर1 April 2013 at 02:35

    बड़ी खुशी होती है यह देखकर जब आप अपने ब्लॉग पर दूसरों को भी उनका हुनर प्रस्तुत करने का मौका देती हैं . कम समय में तेजी ये सुप्रसिद्ध होता आपका ब्लॉग स्वप्निल सौंदर्य सही मायनों में सुंदरता के सही व सटीक अर्थ को परिभाषित करता है . ऐसे ही रहियेगा . बहुत बहुत आशीष .


    डॉ . विमला ठाकुर

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  19. शिल्पी सक्सेना1 April 2013 at 02:37

    विवेक जी की कलाकृ्तियाँ अचंभित कर रही हैं मुझे मानो जैसे मैं फोटोस देख रहा हूँ . बहुत लाजवाब चित्रकारी .
    - शिल्पी सक्सेना

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  20. तरुण गुप्ता1 April 2013 at 02:38

    महारानी गायत्री के चित्र की तारीफ में शब्द कम पड़ रहें हैं . नि: शब्द हूँ ऐसी चित्रकला को देख . विवेक जी कमाल हो आप!
    स्वप्निल जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया ऐसी कलात्मक दुनिया के दर्शन कराने के लिये.
    - तरुण गुप्ता

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  21. अनन्या गौर1 April 2013 at 02:40

    प्रभावशाली कला ... स्वप्निल जी बहुत बखूबी से विवेक जी की शख्सियत से रुबरु कराया है आपने हमें . दोस्ती का फर्ज बखूबी निभाया है आपने. बधाई विवेक श्रीवास्तव जी!

    - अनन्या गौर

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  22. मृ्दुला त्रिपाठी1 April 2013 at 02:42

    विवेक जी के हाथों में तो सचमुच जादू है . बहुत सुंदर चित्रकला. बधाई विवेक जी
    स्वप्निल जी - आपका आभार !

    मृ्दुला त्रिपाठी

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  23. बहुत सुंदर...चित्रकला और आपकी प्रस्तुति भी।।।

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  24. wah ........... kya kamal ki art hai .... stupendously xcellent .
    but swapnil di ..why have you mentioned that incident ..... omg !!!!! that incident was hilarious . nice presentation and i love all the sketches .... sooooooo Great . keep it up and keep coming up with more blogs like this .
    best wishes to swapnil di and vivek bro.

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  25. what to say at these beautiful & admiring sketches..

    ReplyDelete
  26. Thankyou very much Swapnil.. for doing such a great work for me. Thanks to all Readers and viewers for their valuable appriciation. Thanks to Rishabh, who is also a great artist. I am not very good writer, but I can say Swapnil you are a Great artist, designer, friend and person. Beecause its easy to promote yourself but its not easy to promote other person's work.

    Regards,
    Vivek

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