मातृ्त्व ..........





' स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन '  की पेशकश ......
" सफ़केशन "
05 घुटन भरी कहानियाँ जो आपको ज़िंदगी के असल मायनों के बारे में पुन: विचार करने पर बाध्य कर देंगी 








'Swapnil Saundarya e-zine'  presents 

"Suffocation " ........

05 Suffocating stories that will bound you to re-think about the reality of Life ......
                                                

                                                                                          ( In Hindi .............. )



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मातृ्त्व  ..........







' सुनीति '- एक तेरह वर्षीय बालिका थी. बालपन की मासूमियत उम्र के साथ होने वाले बदलावों पर भारी पड़ रही थी और सुनीति उस नाज़ुक उम्र में होने वाले बदलावों व भावनाओं की तीव्रता पर नियंत्रण नहीं कर पा रही थी. न ही उचित सामंजस्य बैठा पा रही थी . सुनीति , अपनी उम्र से तीन वर्षीय बड़े युवक - 'मनजीत' , जो कि उसके ही विद्यालय में पढ़ता था , के प्रति आकर्षित होती चली जा रही थी.

' सुनीति '- एक गरीब परिवार की लड़की थी ...इकलौती थी ... अत: माँ- बाप गरीब होने के बावजूद उसके लालन - पालन में कोई कमी नहीं रख रहे थे. भूरी आँखें, साँवला रंग , घुँघराले बाल , सुरीला बोलने वाली व गायन करने वाली सुनीति अपने माता पिता की लाडली थी . सुनीति  की प्रिय मित्र थी - मालिनी . इनकी दोस्ती के चर्चे पूरे विद्यालय में प्रख्यात थे. मालिनी ही मनजीत और सुनीति के बीच की ऐसी कड़ी थी जो इनके रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए भरकस प्रयास कर रही थी . मालिनी , अपने ही कक्षा के एक छात्र ' राहुल ' के प्रेम में गिरफ्तार थी . पर राहुल , सुनीति और मालिनी की दोस्त ' सपना ' के प्रति आकर्षित था .

' सपना ' - श्वेत वर्ण , बेइंतेहा खूबसूरत , भोली, मासूम , मेधावी, दयावान , गुणवान व थोड़ी अड़ियल स्वभाव की लड़की थी . प्राय: कक्षा के अन्य छात्र - छात्राओं को वह फूटी आँख नहीं सुहाती थी , कारण था उसका अड़ियल स्वभाव . सपना भी इस बात से भली  प्रकार से परिचित थी . अत: वह सबसे कम ही बात करती थी. विद्यालय के शिक्षक भी सपना के अड़ियल स्वभाव के कारण उसे समझाते रहते थे कि , " बेटा ! तुम्हारा थोड़ा घमंडी व अड़ियल स्वभाव , तुम्हें दूसरों से काट रहा है . लोग तुम्हारे दोस्त कम , दुश्मन अधिक बन गए हैं. " .....सपना अपने शिक्षकों की इन बातों पर प्राय: मुस्कुराती और कहती , " सर ! मेरे घमंड से किसी और का नुकसान तो नहीं होता या मैं किसी का दिल तो नहीं दुखा रही या किसी को बेवजह नीचा दिखाना मेरी फितरत नहीं और वैसे भी मुझे ऐसे दोस्त नहीं चाहिये जो दोस्ती की आड़ में पीठ पीछे छुरा खोपे ......मुझे आसथीन के साँप नहीं पालने .....वैसे भी दोस्त नहीं तो क्या हुआ , अपना सुख- दुख मैं, अपने दुश्मनों के साथ ही बाँट लूँगी . "  सपना की बातें सुन उसके शिक्षक भी हँसने लगते .


एक बार जब सुनीति की बेस्ट फ्रेंड मालिनी ने राहुल से अपने प्रेम का इज़हार किया तो राहुल ने उसके प्रेम प्रस्ताव को टुकरा दिया और इसका कारण सपना को बताया . किंतु जब राहुल ने सपना के समक्ष अपने प्रेम का इज़हार किया तो उसे बदले में सपना द्वारा एक करारा तमाचा मिला. अब राहुल व  मालिनी , दोनों ही सपना के कटटर शत्रु बन गए थे. उधर मनजीत और सुनीति का बचकाना प्रेम परवान चढ़ चुका था. मनजीत सुनीति का पीछा करता ....सुनीति यदि किसी अन्य लड़के से बात कर लेती तो मनजीत उस लड़के को खूब पीटता . सुनीति को ये सब  बहुत अच्छा लगता था . सुनीति को मनजीत का दीवानापन , पागलपन आकर्षित करता चला गया . और एक दिन सुनीति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो बैठी ..........सुनीति की वो चंद पलों की कमज़ोरी उसके आने वाले भविष्य को काले अंधकार की ओर ले जाने वाली थी पर सुनीति  को उसकी हरकतों पर शर्मिंदगी तो दूर पछतावा भी नहीं था.

मनजीत और सुनीति के बीच वो सब चलता गया जो गलत था. और आखिरकार परिणाम बेहद भयानक हुआ . सुनीति गर्भवती हो चुकी थी . मात्र  9वीं कक्षा में गर्भ ठहरना कोई मज़ाक न था . कुछ दिनों बाद ये बात पूरे विद्यालय में, सुनीति के घरवालों , रिश्तेदारों , पास- पड़ोस में आग की तरह फैल गई.  सुनीति  का घर से निकलना निषेध हो गया . आंतरिक कलह, दुख- दर्द, मार , पीट, हाय- तौबा के बाद सुनीति के माँ- बाप ने वो बच्चा गिरवा दिया. और कुछ माह बाद मामला ठंडा होने के बाद सुनीति पुन: विद्यालय जाने लगी. सबको सब कुछ पता था. सुनीति से लोग परोक्ष- अपरोक्ष रुप से इन बातों के पीछे की सच्चाई जानना चाहते थे . सुनीति अब शर्म के कारण दुनिया वालों का समाना कर पाने में स्वयं को अक्षम मान रही थी . वह कुछ भी कर के इन प्रश्नों व बातों से खुद को दूर करना चाहती थी. माँ- बाप के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे शहर छोड़ सकें .सुनीति की शिक्षा- दीक्षा भी मुश्किल से ही चल् पा रही थी . मालिनी से अपनी दोस्त सुनीति का यह दर्द बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था. अत: मालिनी ने सुनीति को उसकी परेशानियों से निजात पाने का रास्ता बताया . मालिनी ने षड़्यंत्र रचा कि क्यों न तुम्हारे साथ जो भी हुआ वो हम ' सपना' के ऊपर डाल दें. हम लोग धीरे- धीरे अफवाह फेला देंगे कि ये सारी बातें जो तुम्हारे लिये प्रचलित हैं ... असल में वो सब सपना के साथ हुआ और इसके लिए तुम्हें ( अर्थात सुनीति को ) सपना की सच्ची दोस्त बनने का नाटक करना होगा ताकि तुम्हारे कृ्त्यों को सपना की ज़िंदगी के साथ 'मिक्स- एंड - मैच' किया जा सके . वैसे भी सपना एक दयालु स्वभाव की लड़की है....... अभी हाल ही में उसने दो छोटे- छोटे बच्चों का एक्सीडेंट होने से बचाया . छोटे बच्चे उसे प्यार से ' परी दीदी ' भी बुलाते हैं तो बस ! हम यही प्रचार कर देंगे कि सपना उन बच्चों में अपने होने वाले बच्चे का अक्स देखती है . चूंकि उसका गर्भपात हो चुका है ...इसलिए वह अपने मन को इन बच्चों की मदद करके संतुष्ट करना चाहती है.

मालिनी ने अपने षड़यंत्र का दूसरा चरण बताया ..... वैसे भी सपना सब से कम बात करती है क्योंकि वह 'रिसर्व नेचर' की है ... अत इस बात को हम ऐसे फैलायेंगे कि असल में सपना एक गंदी लड़की है, तभी तो कोई उससे बात नहीं करता ...... और कौन आ जाएगा सपना का साथ देने और  खुल कर कभी हम सामने आएंगे नहीं ....  सुनीति  , मालिनी के बातों से झट से सहमत हो गई.

उधर सपना द्वारा लिखी गई कहानी ' मातृ्त्व ' एक प्रख्यात अखबार में प्रकाशित हो चुकी थी. सपना को जगह- जगह से बधाई पत्र , प्रशंसा पत्र प्राप्त हो रहे थे . उधर मालिनी और सुनीति राहुल के साथ मिलकर सपना के खिलाफ रचे कुचक्र को अंजाम दे रहे थे. लोग भ्रमित थे ...मालिनी , सुनीति और राहुल की बातों पर किसी को विश्वास नहीं था पर सपना से ईर्ष्या करने वाले कहीं न कहीं इन बातों को हवा दिये जा रहे थे.

उधर सपना की व्यस्तता दिनों दिन बढ़्ती जा रही थी . इतनी कम उम्र में बड़ी- बड़ी पत्र- पत्रिकाओं के संपादक , प्रकाशक आदि उससे मिलना चाहते थे . उसकी कहानियाँ . लेख प्रकाशित करना चाहते थे . इस व्यस्तता के बावजूद  सपना को कहीं न कहीं अपने खिलाफ रचे गए षड़्यंत्र की भनक थी .

सुनीति का अचानक सपना से दोस्ती बढ़ाना . उसके घर आना - जाना . अचानक लोगों के रुख में आए अंतर को सपना ने नज़रअंदाज़ नहीं किया. पर इसका असर उसने अपने काम पर भी नहीं होने दिया . वक़्त बीतता गया सुनीति , मालिनी व राहुल की उन घिनौनी हरकतों व अफवाहों का कुछ असर नहीं हुआ . पर गलतफहमी के चलते सुनीति अब पहले से निश्चिंत हो गई थी कि उसने सपना के खिलाफ जो षड़्यंत्र रचा वो रंग लाया है. सुनीति अपनी ही गलतफहमियों की दुनिया में मस्त थी. सपना ने अपने आप को अपनी पढ़ाई और अपने काम तक सीमित कर लिया. एक सशख़्त लेखिका के रुप में वह तेज़ी से उभर रही थी. उसके बेधड़क , स्वतंत्र विचारों की तारीफें  हर ओर हो रही थी.

सुनीति , मालिनी , राहुल व कक्षा के अन्य सहपाठी भी अब सपना की लोकप्रियता व सफलता का लोहा मानने लगे थे . हर कोई सपना से जुड़ना चाहता था .  कभी सपना को अपना दुश्मन बताने वालों के लिए अब सपना उनकी सच्ची मित्र थी पर सपना को किसी से कोई उम्मीदें व आशायें नहीं थी . वह सिर्फ अपनी दुनिया में सीमित और अपने कर्म को तवज्जो दे रही थी.

इस बीच सुनीति और मनजीत का प्रेम एक बार पुन: परवान चढ़ा . पिछला मामला ठंडा हो चुका था . एक वर्ष बीत गया था . सुनीति के शरीर में भीषण बदलाव आने प्रारंभ हुए. ये बदलाव साधारण नहीं थे. साफ तौर पर सुनीति पुन: गर्भवती हो चुकी थी . अबकी बच्चा गिरवा लेने का विकल्प भी नहीं था क्योंकि बहुत देर हो चुकी थी . हर ओर सुनीति की थू- थू हो रही थी ....इतनी बदनामी ........इतनी घृ्णा ..सुनीति के बर्दाश्त से बाहर थी . इस बार मालिनी ने सबसे पहले अपनी सबसे प्रिय मित्र सुनीति का सबसे पहले साथ छोड़ा . मालिनी ने स्वयं चीख - चीख के सुनीति को चरित्रहीन कहा. ये सुनीति से बर्दाश्त नहीं हुआ. आक्रोश में आकर सुनीति ने पूरे विद्यालय , परिवार, समाज के समक्ष मालिनी के षड़्यंत्रों की पोल खोल दी....... मालिनी ने भी अपनी दोस्त पर लाँछन लगाने में कोई  कसर बाकी नहीं रखी . यहाँ तक की अपने को सही सिद्ध करने के लिए मालिनी ने सुनीति के मुँह पार काली स्याही तक फेंक डाली. अब सुनीति टूट चुकी थी . तभी अचानक सुनीति की नज़र पड़ती है सपना के मुस्कुराते चेहरे पर ........ सुनीति अपनी आँखें पुन: मसलती है , पर सपना वाकई उस पर हँस रही थी , यह सुनीति से बर्दाश्त नहीं हुआ ............

" क्यों री ! तू हँस रही है ...बदतमीज़ , घमंडी लड़की .. अपने आप को महान बनती है ....कुछ कर नहीं पाएगी कभी तू ........... बहुत बड़ी लेखिका बनती है न तू ..............तो इस अभागी मां का दर्द लिख ..... मैं , माँ हूँ ..मेरी कोख में पलने वाले बच्चे की क्या गलती ...मुझ पर रहम करो ! मेरे बच्चे पर कोई तो रहम करो ! मुझमें ममता है ..... मातृ्त्व है ..... मैं , गर्भपात नहीं करा सकती .तुम तो बहुत बड़ी लेखिका हो . बहुत मेधावी हो . तुम मेरे साथ गलत नहीं करोगी ......... तुम मुझे न्याय दिलाओगी . एक बार तुम बोल दो कि जो मैंने किया वो सब मान्य है ....सही है . सपना तुझे दोस्ती का वास्ता ....तुम बोल दो कि मैं सही हूँ . " - सुनीति ने सपना को झकझोरते हुए कहा.

सपना ने सुनीति को दो मिनट देखा और फिर उसके मुँह पर घसीट के एक तमाचा मारा. हर तरफ एकाएक सन्नाटा छा गया.

" खुद को माँ कह रही है , बेशर्म ! तू माँ है ????? अपनी ऎश को , अपनी चरित्रहीनता को मातृ्त्व के रंग में ढ़ाल रही है . अपनी बार- बार की कमज़ोरी का अपनी हवस को अब मातृ्त्व का नाम दे रही है . पहला गर्भपात करा के तेरी मातृ्त्व की भावना कहाँ चली गई थी . ज़ाहिर सी बात है कि इन सबमें तेरे गर्भ में पलने वाले बच्चे की कोई गलती नहीं पर तू गलत है ...हर हाल में , गलत है..... अपने काले कृ्त्यों को दूसरे के सिर फोड़ने का क्या नतीज़ा निकला. जिस बेस्ट फ्रेंड के षड़्यंत्र के अनुसार तू मुझ पर मेरे पीठ पीछे लाँछन लगाती रही .. आज उस मलिनी ने खुद तेरे मुँह पर कालिख लगायी है . और ये राहुल ने भी तुम लोगों का साथ दिया था ...... ये वही राहुल है न , जिसने अपनी बेहूदगी के कारण मेरे हाथों से ऐसा तमाचा खाया था जिसके निशां वह ताह ज़िंदगी भी नहीं मिटा पाएगा . और तू देख अपनी हालत , मातृ्त्व की परीक्षा तो अब होगी .... अब तू न चाहते हुए भी इस बच्चे को जन्म देगी . उसका पालन पोषण करना होगा . दुनिया तुझ पर थूकेगी . जैसे - जैसे बच्चा बड़ा होगा वो भी तुझ पर थूकेगा . जाओ अभी फिलहाल अपनी ज़िंदगी की चिंता करो और आज से ...अब से हर पल , हर वक़्त मैं, तेरी मातृ्त्व , तेरी ममता को देखूँगी  कि तू कितनी बड़ी माँ है और कैसी है तेरी ममता . "

यह कहकर सपना वहाँ से चली गई. सुनीति स्तब्ध थी ....मानो उसके पैरों के नीचे से जमीं खिंच गई हो. बच्चे अपनी परी दीदी अर्थात सपना की तारीफ कर रहे थे और सुनीति को चुडैल दीदी के नाम से संबोधित कर रहे थे . शिक्षक स्तब्ध थे . उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इतनी छोटी उम्र में सपना को इतनी बड़ी- बड़ी बातों का ज्ञान् कैसे हुआ ... ... और दूसरी ओर अचंभित थे कि इतनी छोटी उम्र में राहुल , मालिनी और सुनीति जैसे बच्चे कैसे इतना नीचे गिर सकते हैं. शायद यही घोर कलियुग है.

सुनीति और मनजीत की शादी हो गई और 8 वर्षों के बाद पता चला कि मनजीत की ब्लड कैंसर से मृ्त्यु हो गई और सुनीति अपनी मानसिक  स्थिति खो बैठी . वो आज पागल खाने में भर्ती है. और उसके बच्चे का क्या हुआ , इसके बारे में किसी को कुछ खबर नहीं . कहा जाता था कि मनजीत की मौत के करीब '5  वर्ष' बाद सुनीति की खराब मानसिक स्थिति के कारण उसके बच्चे को उससे अलग कर दिया गया था ....सुनीति खुद , कुछ समय बाद पूरी तरह पागल हो गई  थी .

सपना , आज एक प्रख्यात लेखिका है और एक बच्चे की माँ भी है जो कि उसने कुछ '5 वर्ष' पूर्व गोद लिया था . इतनी कम उम्र में उनकी अतुल्नीय मातृ्त्व भावना के कारण सपना आज परी माँ के नाम से प्रख्यात है .




- भूमिका सचदेव 
( औरंगाबाद, महाराष्ट्र् )








COMING SOON !!!!!!!!!!!!!!!






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