Suffocation


' स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन '  की पेशकश ......

" सफ़केशन "
05 घुटन भरी कहानियाँ जो आपको ज़िंदगी के असल मायनों के बारे में पुन: विचार करने पर बाध्य कर देंगी






'Swapnil Saundarya e-zine'  presents 

"Suffocation " ............

05 Suffocating stories that will bound you to re-think about the reality of Life ...... 

                                                                       ( In Hindi .............. )







संपादकीय 



प्रिय पाठकों .......

आप सभी को नमस्ते !


स्वप्निल सौंदर्य ई- ज़ीन का प्रथम वर्ष आप सभी के प्रेम व आशीर्वाद के कारण सफलतापूर्वक संपूर्ण हुआ ...... अब हम द्वितीय वर्ष की ओर कदम बढ़ा रहे हैं..... बहुत जल्द ही स्वप्निल सौंदर्य ई- ज़ीन एक नए रंग -रुप में  आप सभी के समक्ष प्रस्तुत होगी .. एक नए फ्लेवर के साथ ...... वैसे तो हमारी ई- ज़ीन के द्वितीय वर्ष के प्रथम अंक को जून माह तक अपडेट करना था पर कुछ तकनीकी खराबी के चलते यह संभव न हो पाया .....उसके लिए अपने पाठकों से हम क्षमा माँगते हैं .... पर ज़ाहिर सी बात है कि इस गलती के लिए सिर्फ क्षमा माँगने से काम नहीं चलेगा .. अत: अपने पाठकों के लिए हम ' सफ़केशन ' नामक एक बेहतरीन लघु कहानियों का संग्रह लेकर आए हैं जो कि आप सभी के लिए  एक फुहार की भाँति होगा..... हम 'स्वप्निल सौंदर्य ई- ज़ीन' के साथ ' सफ़केशन  ' नामक ई- बुक को आप सभी के समक्ष  पेश कर रहे हैं जिसके अंतर्गत  हम लेकर आएं हैं 05 ऐसी कहानियाँ जो आपका ज़िंदगी के प्रति नज़रिया बदल कर रख देंगी .... आपको ज़िंदगी के असल मायनों पर विचार करने के लिए पुन: बाध्य कर देंगी, ये 05  कहानियाँ ..............

'स्वप्निल सौंदर्य ई- ज़ीन' के प्रथम वर्ष के अंतिम अंक के बाद भी हमें पाठकों के पत्र प्राप्त होते रहें ..जिसमें उन्होंने ढेर सारी कहानियाँ , अनुभव , कनफेशन्स , कविताओं , लेखों द्वारा हम पर  अपने प्रेम की वर्षा की... हम उन सभी पाठकों का हृ्दय से धन्यवाद करते हैं  और आपके द्बारा भेजी गई कुछ खास कहानियों को संगठित कर ये ई- बुक के द्वारा इन्हें जन - जन तक पहुँचा रहें हैं .....

जिन कहानियों को हम प्रकाशित नहीं कर रहे हैं, उसके पीछे का कारण ये कतई नहीं कि वे कहानियाँ श्रेष्ठ नहीं अपितु सिर्फ ' स्वप्निल सौंदर्य ई- ज़ीन' की विषय - वस्तु के अनुरुप नहीं हैं.... अत: अप्रकाशित कहानियों को हम वापस भेज रहें हैं ताकि आप उनका अन्यत्र प्रयोग कर लें........ प्रकाशित कहानियों  में देश के कोने - कोने से लेखकों व लेखिकाओं ने अपने अनमोल अनुभवों का समावेश किया है जो बेहद सराहनीय व अनुकरणीय है.......ये कहानियाँ हमें ज़िंदगी की सच्चाई से अवगत कराती हैं.... जहाँ एक ओर ये कहानियाँ हमें  भावविभोर करती हैं...... ज़िंदगी में किशोरावस्था से लेकर् यौवन और यौवन से लेकर वृ्द्धावस्था तक के सफर के दौरान की कठिनाइयों से डट कर सामना करने की क्षमता देती हैं..... तो कुछ कहानियाँ , हमे सोचने पर विवश करती हैं कि कैसे कुछ लोग अपनी ही  गलतियों के बोझ तले दब कर अपनी ही ज़िंदगी को अपने कर्मों और गलत निर्णयों द्वारा नर्क बना लेते हैं.... नि: संदेह कहानी मन- मस्तिष्क में घुटन पैदा करती हैं पर प्रत्येक कहानी का अंत ही उस घुटन से हमें मुक्त कराता है और ज़िंदगी की कड़्वी व कठोर सच्चाईयों से हमारा साक्षात्कार कराता है .


" कभी वक़्त का ज़ख्म यूँ मिला हमें,
कि घुटन की चुभन हर वक़्त, हर पल , कुछ इस कदर हुई हमें,
बन गई रुह भी एक आवारा लाश की तरह,
जो घुटती तो है घुटन में, गर जिस्म छोड़ने को राज़ी नहीं.
मकबरे रुपी जिस्म ये मेरा , भी दूर नहीं होता इस आवारा रुह से
जाँ मेरी निकलने को होती है आतुर पर पीछे है एक अधूरापन .
ओह ! ये घुटन मेरी इस कदर हूक उठाती है,
साँसे मेरी थम कर रह जाती हैं पर काश ये घुटन की हूक ,
एक बार बाहर आ जाए मेरे दिल से ,
तो उस हूक के साथ जिस्मानी मकबरे के मोह में कैद ,
वो आवारा रुह भी बाहर आए मेरे जिस्म से .
पर ये घुटन सिर्फ और सिर्फ घुटाती है इतना ,
कि हम तरसे हैं , पानी कि एक-एक बूंद के लिये
उस वक़्त गर कुछ एहसास होता है,
तो बस होता है घुटन की घुटन का ,
घुटन की चुभन का.
जो पानी की एक बूंद से ला तो देती है जिस्मानी मकबरे में
वापस जां,
पर वापस जां के जिस्म में आ जाने से , मिला तो आखिर मिला भी क्या?
मिली तो हमें मिली बस घुटन की घुटन ."




कहा जाता है कि ये ज़िंदगी एक अजीब खिलौना है ....हाथ आए तो मिट्टी और खो जाए तो सोना है .......... कहानियों में एक ओर बालपन का बचपना , मासूमियत की झलक तो वही मासूमियत कब और कैसे हैवानियत में तब्दील हो जाती है , जानने को मिलेगा ....कुछ कहानियाँ रुह में कँपन पैदा करती हैं तो कुछ हँसाती हैं.....कुछ घुटाती हैं और ज़िंदगी का सार भी बताती है. ख़्वाहिशें .....बंदिशें , आवारापन , पागलपन, जुनून , हवस .....की दास्तान अपने में समेटे कुछ कहानियाँ ..... हर पल घुटती , मात खाती ज़िंदगी ..... घुटन भरी ... हृ्दय को कचोटती हुई चंद कहानियाँ .............

" घुट- घुट के कब तक जिएंगे ये ज़िंदगी ,
खुशकिस्मती होती है उनकी ,
जिनको होती है कभी न कभी तो मौत नसीब .
घुटन भरी मौत भी कुछ हद तक दे जाती है ,
पलभर का सुकून कहीं ,
पर हमारी किस्मत अलग है ,
हमें तो नहीं होती है मौत भी नसीब  ."




मर्यादा , संस्कारों, ज़िम्मेदारियों , आत्मसम्मान और मजबूरी के बीच खड़ी तन्हा ज़िंदगी..... आत्मसम्मान छिन जाने का डर ... अपनों से बिछड़ जाने की घुटन ...हर पल हारती ..तिल - तिल के गलती ज़िंदगी की घुटन ..........................

"मरकर भी सुकून न होगा,
एक अधूरापन दिल-ए-ज़िगर में हरदम हरपल होगा.
अधूरी रह गई ज़िंदगी , अधूरे रह गये सपने.
अधूरे रह गये खुदा से किये हर एक वायदे,
अधूरे रह गये वो अफसाने,
अधूरी रह गई एक कहानी , जिसे पूरी कर खुदा को थी दिखानी .
ये अधूरापन हमें मरकर भी सुकून न देगा,
हरदम हरपल ये एक ज़ख्म नासूर बन
कर उमड़ता रहेगा.
तो गर मर भी गए हम तो आखिर मरकर भी क्या होगा?
जब मरकर भी हमें कभी चैन व सुकून न होगा."




खामोशी की आवाज़ ..... भीतर की हूक का विध्वंसकारी रुप ...... सर्विनाश की हुंकार ....... अपनी ज़िंदगी के दुखों पर , पीड़ा पर , तकलीफों पर , मजबूरियों पर , कमज़ोरियों पर लगया गया पूर्णविराम ......... कहानियाँ अंत की ..... नए प्रारंभ की .......कहानी एक अजनबी की ........

"घुटन का धुँआ कुछ इस कदर उठा,
कि मानो जिस्म व रुह का भी दम घुटने हो लगा.
तब आखिरकार वो घुटन दिल व दिमाग को चीरती हुई
होंठो से बनकर निकली हूक ,
घुटन की हूक थी वो ज्वालामुखी के उबलते लावे का रुप ,
जिसने छोड़ा हमारा जिस्म व रुह लेकर रुप हुंकार का
और बजा दिया शंख सर्व विनाश के आरंभ का .
उस हुंकार में था पूर्ण विराम !
पूर्ण विराम : बुराई, बुरी शक्ति , बुरे लोग, बुरे कर्म का,
पूर्ण विराम : अधर्म, हिंसा, अशांति व दुष्कर्म का."




अंत में इन पाँच दिल को कचोटती कहानियों के बारे में बतलाने के लिए इन चंद पंक्तियों की सहायता ले रहा हूँ .....आशा है कि इस सफर में आप सभी का साथ मिलेगा और आपके प्रेम , टिप्पणियों व सलाहों द्वारा हर पल हमें और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती रहेगी  ..... अंत में आप सभी से निवेदन है कि जुड़े रहिये ' स्वप्निल सौंदर्य ई- ज़ीन ' के साथ और बनाइये अपनी ज़िंदगी को अपने सपनों की दुनिया .


ये अजीब कश्मकश है ज़िंदगी की ,
जिंदगी की शुरुआत हुई कुछ धुंधली सी.
जब धुंध में झांक कर देखा हमने तो पाया,
दुश्मनी का कोहरा हर ओर,
दुश्मनी की आड़ में अपने बन के बेगाने ,
बिछाये थे षड़यंत्र , कुचक्र का जाल हर ओर .
अपने ही जब थे बेगाने तो बेगानों से क्या दिल लगाते .
बस दुश्मनी की आग कुछ इस कदर लोगों पर सवार हुई ,
कि मासूमियत कब इस दुश्मनी का शिकार हुई , इसका हमें अहसास नहीं.
काश अहसास इसका हो जाता हमें भी जल्द से जल्द
कि नहीं रखता कोई मोल अपनों के अफसानों का
इन बेगानों से क्या कहे , इन्हें तो चढ़ा है खुमार दुश्मनी निभाने का,
खुमार ये ऐसा चढ़ा है कि उतरेगा ये नहीं समझाने से ,
ये नशा तभी उतरेगा अंजाम इन सबका दिखाने से .
दुश्मनी एक तरफा नहीं निभती कभी,
पर इन कमजर्फों को क्या कहें
जो इस बात को समझे ही नहीं कभी.
लो नादान उम्र से ही पर उतर लिए दुश्मनी की आग में हम भी,
बना लिया दुश्मनी को अपना मुकद्दर
और अब देखेगी दुनिया आखिर क्या होता है
असलियत में दुश्मनी का खौफनाक मंजर.




आपका,
ऋषभ शुक्ला
Website : www.rishabhrs.hpage.com





COMING SOON !!!!!!






Swapnil Saundarya ezine  presents ' Suffocation '... 05 suffocating stories that will bound you to rethink abt the reality of life... do visit .

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