Diary of Dr Akanchha Awasthi Part II





आकांक्षा की डायरी से - 2

 

बदलते परिवेश में महिलाओं का योगदान




ब आप किसी पुरुष को शिक्षित कहते हैं तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है . किंतु जब आप एक स्त्री को शिक्षित कहते हैं तो उसका परिवार की नहीं अपितु उसका पूरा परिवेश शिक्षित होता है.

संपूर्ण विश्व में अपनी संस्कृति व सभ्यता की एक अलग अलख जलाए हुए हमारी भारतीय संस्कृति की अलग पहचान है जिसे बनाने में हमारे समाज की स्त्रियों का भी एक विशेष योगदान रहा है. इसका गवाह हमारा धर्म व इतिहास रहा है .हमारे धर्मों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि सीता,  पार्वती,  अनसुइया जैसी देवियों के स्त्रीत्व की परीक्षा में धरती ने भी अपना सीना चीर कर दिखाया  है.

पाश्चात्य संस्कृति व अधुनिक युग ने हमारे समाज की महिलाओं  को एक नया ही परिवेश दिया है . भारत एक पुरुष प्रधान देश है, उसके बाद भी नारी ने अपने संघर्ष व जुनून की बदौलत एक नया मुकाम स्थापित किया है. आज महिलाएं हर एक विभाग में सरकारी दफ्तर हो या प्राइवेट कंपनी हर जगह  महिलाएं अग्रणी हो रही हैं .  घर की ज़िम्मेदारी से लेकर अपने दफ्तर के हर कार्य को पूरी कुशलता के साथ कर रही हैं . आज महिलाएं समाज के निर्माण में एक अलग ही भूमिका निभा रही हैं .  आज महिलाएं समाज का दर्पण हैं .  राजकुमारी अमृत कौर , श्रीमती  रुस्तम जी,  फरदून जी ,  सरोजिनी नायडू  आदि इन्होंने महिलाओं के  सर्वांगीण विकास के लिए बहुत से कार्य किए.

महिलाएं समाज की घुरी  हैं . एक नारी में ममता होती है , उसमें  समझ होती है , सँयम होता है , वो कार्यों को सजगता, संयमता व शालीनता से करती है. महिलाएं शिक्षित होकर जीवन के प्रति लापरवाह  न होकर अपने कर्त्तव्यों के प्रति सजग रहती हैं . महिलाओं ने ही सीमित संसाधनों के बाद भी समाज में अपनी प्रतिष्ठित भूमिका निभायी है तथा शिक्षा के प्रति विशेष  जागरुकता व लगन के कारण ही हमारे समाज में स्त्रियाँ आज किसी के अधीन नहीं बल्कि स्वावलंबी बन गयी हैं . नारी का शिक्षित होना घर से लेकर कार्यालय तक एक प्रभावशाली समाज का निर्माण करता है. जहाँ तक शिक्षा के क्षेत्र में नारी अस्तित्व की चर्चा होती है वहाँ नारी का विशेष स्थान है. बाल शिक्षा हो या प्रौढ़ शिक्षा सभी में नारी की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता. शिक्षार्थी के विचारों को स्वावलंबन प्रदान करने की जो  क्षमता एक स्त्री के पास होती है वह अन्यत्र देख पाना दुर्लभ है. इसलिए कहा जाता है कि प्रथम पाठशाला घर व प्रथम शिक्षिका माँ के रुप में होती है .  इस बात में एक मत राय यही बनती है कि शिक्षित महिलाओं ने शिक्षा को आत्मसात कर शिक्षा जगत को एक नया आयाम दिया है.  जिसके लिए सभी महिलाएं बधाई की  पात्र हैं.  इसी के साथ मैं, आकांक्षा अपनी डायरी के इस पृष्ठ पर पूर्णविराम लगाती हूँ.

आभार.

आकांक्षा अवस्थी
सहा0 प्रवक्ता ( गृह विज्ञान विभाग )
सरस्वती महिला महाविद्यालय








Swapnil Saundarya Label.

Make your life just like your Dream World .








copyright©2013- Present .Swapnil Saundarya Label .All rights reserved

No part of this publication may be reproduced , stored in a retrieval system or transmitted , in any form or by any means, electronic, mechanical, photocopying, recording or otherwise,without the prior permission of the copyright owner.

Copyright infringement is never intended, if we published some of your work, and you feel we didn't credited properly, or you want us to remove it, please let us know and we'll do it immediately.

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

मेहंदी स्पेशल { Mehendi Special }

Diary of a Young Poet ~ Sanjay Chauhan

A Desi Tale of our first Indian Chemo Dolls : Swapnil Saundarya Chemo Dolls !!!!