Mother's Day Special !!!!!!



Swapnil Saundarya Label # Celebrating Mother's Day !!







Wishing You  all a very
Happy Mother's Day !







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आकांक्षा की डायरी से - IV 




नमस्ते पाठकों .......

आप सभी को हैप्पी मदर्स डे !.

रिश्ते तो बहुत हैं पर माँ सिर्फ एक है.........माँ के प्रति प्यार के इज़हार में शब्दों की सीमा नाकाफी होती है. वैसे तो बागों में फूल बहुत से हैं लिकिन गुलाब एक है , वैसे ही  रिश्ते तो बहुत हैं पर माँ एक  है. खुद खुदा की प्रतिछाया होती है माँ. धरती की तरह  माँ भी अपने जीवन में अपने बच्चो का सुरक्षा कवच बनती है. माँ की ममता को किसी परिभाषा में बाँधना मुश्किल है. दुनिया में आने के बाद बच्चा सबसे पहले अपनी माँ को ही पहचानता है और उसके मुँह से निकलने वाला पहला शब्द माँ ही होता है. मुझे अपनी माँ का साथ ज़िंदगी की कड़ी घूप में शीतल छाया की तरह लगता है. मेरी हर समस्या का इलाज मेरी माँ के पास रहता था चाहे आचार डालना हो या कोई पकवान बनाना हो या फिर कोई भी व्यक्तिगत समस्या..... मेरी हर परेशानी माँ के पास जाते ही खत्म  हो जाती थी . मेरी माँ ने अक्सर मुझे यही समझाया कि जीवन में जो भी स्थिति आए उस पर रोने या कमज़ोर पड़्ने के बजाए उसका सामना दृढ़्ता के साथ करो. मैं अपनी माँ से बेइंतेहा प्यार करती थी ....हर बच्चा करता है . पर मेरे लिए मेरी माँ ही मेरे जीवन काआधार थीं ..वे मेरे जीवन का पर्याय थीं शायद इसी कारण मुझे आज भी ऐसी अनुभूति होती है कि  गुजरना भीड़ से हो या सड़क पार करनी हो ....अभी भी लगता है मानो माँ ने हाथ मेरा थाम लिया हो.






आज मदर्स डे के अवसर पर मैं आप सभी के साथ अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण को साँझा कर रही हूँ....मेरे वाचस्पति (पी.एच. डी) करने के पीछे एक ऐसी घटना का  हाथ रहा जिसने मेरी ज़िंदगी को एकदम झकझोर कर रख दिया और पी. एच.डी करना  मेरा लक्ष्य बन गया . इस संदर्भ में मेरी बहन डॉ शशि बाला तिवारी जो वर्तमान समय में राजकीय महाविद्यालय में प्राचार्या के पद पर आसीन हैं, ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई.

एक दिन मेरी माँ श्रीमती जयंती मिश्रा ने उनके  समक्ष अपने मन की बात रखी. माँ ने जीजी से कहा कि वे चाहती हैं कि  जिस प्रकार उन्होंने अपने जीवन में घोर संघर्ष किया और पग पग पर काँटों भरी राह पर चलते चलते जीवन बिता दिया , वो नहीँ चाहतीं कि  उसी प्रकार आकांक्षा को भी अपने जीवन में कठिनाईयों का सामना करना पड़े और विवाह पूर्व वह अपने पैरों पर खड़ी होकर ,पूर्णतया स्वावलंबी बन जाए  तो यह उनके जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धी होगी.



जीवन की विडंबना  तो  देखिये कि आने वाला अगला दिन मेरे और मेरे परिवार के लिए प्रकाश की जगह घोर अंधेरा लेकर आया और हमारे लिए सबसे अंधकारमर दिन साबित हुआ ....दुर्भाग्यवश इस बात को कहने के अगले ही दिन मेरी माँ मृत्यु की गोद में सो गईं. परंतु इस घटना ने मुझे मेरी माँ की अंतिम इच्छा के प्रति संकल्पित कर दिया.

आज मैं, पी.एच.डी डिग्री होल्डर हूँ ....एक प्रतिष्ठित महाविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग में बतौर प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हूँ.......अपने नाम के पूर्व डॉ की उपाधि जोड़्कर हर वक़्त एक संतुष्टि का अहसास होता कि मैंने अपनी माँ का स्वप्न पूर्ण किया.

आज ईश्वर की असीम कृपा से मैं भी एक माँ बन गई हूँ  .... माँ इस दुनिया में नहीं हैं पर अभी भी मेरे लिए वे ज़िंदा हैं........मुझे कुछ भी नहीं होगा क्योंकि मुझे यकीन है कि मैं जब घर से निकलती हूँ तो मेरी माँ की दुआ भी मेरे साथ चलती हैं.






आज जब मैं बहुत सी निर्धन,साधनविहीन परंतु कुशल , मेहनती व दृढ़ निश्चयी युवतियों को देखती हूँ तो अपनी माँ की बातें याद आ जाती हैं ..वे कहती थीं कि लड़्कियों को भी लड़्कों की ही भाँति स्वावलंबी होना बहुत आवश्यक है. अपनी माँ की इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मैं ऐसी जरुरत मंद युवतियों को सबल व आर्थिक रुप से सुदृढ‌ बनाने हेतु  उनके लिए कौशल विकास से संबंधित कोर्सेस को प्रारंभ करने के मार्ग पर अग्रसर हूँ.  ईश्वर ने चाहा तो मेरा यह स्वप्न और मेरी माँ की सोच को शीघ्रातिशीघ्र क्रियाशील बना पाऊँगी.
अंत में अपनी डायरी के इस पृष्ठ पर विराम लगाने से पूर्व स्वप्निल सौंदर्य ई ज़ीन के संस्थापक संपादक ऋषभ शुक्ला की पुस्तक एक आशियाने की ओर के समर्पण पृष्ठ पर प्रकाशित उनके द्वारा रचित ये चंद पंक्तियों को आप सभी के साथ साँझा करना चाहूँगी,

राह देखते हुए उनकी ,
हर एक पल बीतता है याद में जिनकी ...
सदियाँ चाहे बीत जाए पर वापस न आएंगी वो
जिनमें थी मेरी दुनिया बसी.
अब तो बस आस लगाए बैठे है कि
शायद वो वापस आ जाएं ,
यादों की दुनिया से ही अभी.



अपनी डायरी का यह पृष्ठ समर्पित करती हूँ अपने माँ को व उनकी उस ओज भरी स्मृति को झंझाओं में खड़े रहने का साहस आज भी दे रही हैं जो.
आप सभी को मदर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं......




आभार.

डॉ आकांक्षा अवस्थी
सहा0 प्रवक्ता ( गृह विज्ञान विभाग )
सरस्वती महिला महाविद्यालय




Dr Akanchha Awasthi is working as Ass. Professor  in the department of Home Science  at Saraswati Mahila Mahavidyala . She has  specialization in Women and child development and is well versed in the art of garment manufacturing . She has a keen interest in writing and has penned down several journals and research papers. She is the pen behind Diary of Dr Akanchha , a permanent section published regularly on Swapnil Saundarya ezine, which is an Indian Lifestyle magazine published bi monthly.

















A letter written on 21st of Feb 1960
*******************************


यादों के पन्नों से :
दिनांक 21- फरवरी - 1960 में लिखा गया वो पत्र ........






यादों के दायरों में महकते ये पल ......
हसरतों के जहाँ में आ मेरे साथ चल.....
बीती हर बात तुझे याद आएगी........
मुहब्बत के आसमां को दिल की ज़मीं मिल जाएगी.

'यादों के पन्नों से' निकल कर आया है यह अनमोल पत्र जिसे हमारी पत्रिका की नियमित पाठिका  ' श्रीमती सदभावना दीक्षित ' ने हमें मेल किया है ....
सदभावना दीक्षित जी लिखती हैं, " स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन से मैं इसके प्रथम वर्ष से जुड़ी हूँ .......इसके एक - एक अंक को प्रिंट्स में निकलवा कर मैंने संजोया है. स्वप्निल सौंदर्य का हर एक लेख मुझे मेरी माँ की बातों की याद दिलाता है ......वे अब इस दुनिया में नहीं रहीं पर उनकी यादें आज भी मेरे हृदय में हैं . हिन्दी साहित्य में वे पी.एच.डी थीं .. फिर भी उन्होंने घर - गृ्हस्थी को तवज्जो दी .. उन्होंने विरासत के रुप में मुझे बहुत सी बातें बताईं जो आज भी उनके आशीर्वाद से मेरे जीवन को संवार रही हैं. विवाह के उपरांत गृ्हस्थी की गाड़ी आगे बढ़ाना सरल नहीं ...बहुत से समझौते करने पड़ते हैं .... एक स्त्री पर विवाह और परिवार को सुखदाई बनाने का बोझ अधिक होता है ..समाज को हम स्त्रियों से अपार अपेक्षाएं होती हैं. मेरा विवाह हुआ ...बहुत परेशान थी मैं कि कैसे मैनेज करुँगी सब कुछ ...मेरी इस उलझन को सुलझाने के लिए मेरी माँ ने मुझे यह पत्र सौंपा जो कि साहित्य विशारद श्रीमती सावित्री देवी व एम0 ए0 , एल0 टी0 श्री कन्हैयालाल जी ने शशिकान्ता जी को दिनांक 21- फरवरी - 1960 में, उनके विवाह में दिया था ......उन्होंने जो इसमें लिखा मेरे अनुसार यही सफल वैवाहिक जीवन का सार है . और इसमें लिखी बातें आज के समय में भी कहीं न कहीं प्रासंगिक हैं.

अब इस अनमोल पत्र को 'स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन' को सौंप रही हूँ क्योंकि मेरी नज़र में आज के दौर में स्वप्निल सौंदर्य से अधिक इस पत्र की अहमियत को  और कोई नहीं समझ सकता ."

आभार

- सदभावना दीक्षित

प्रस्तुत है साहित्य विशारद श्रीमती सावित्री देवी  व  एम0 ए0 , एल0 टी0 श्री कन्हैयालाल जी द्वारा लिखित शशिकान्ता जी को 'दिनांक 21- फरवरी - 1960' में, उनके विवाह के अवसर पर लिखा गया पत्र ::


हमारे अनेक आशीर्वाद
परम सौभाग्यवती प्रिय शशिकान्ता को !
( नव जीवन में प्रथम प्रवेश के शुभ अवसर पर )

' काँटों भरी शाखा को फूल सुंदर बन देते हैं, और गरीब से गरीब , आदमी के घर को एक गुणवती स्त्री सुंदर और स्वर्ग बना देती है ." तुम जिस पति- गृह मैं { अर्थात ससुराल में } प्रवेश पाने जा रही हो , उसका कोना- कोना तुम्हारे शुभागमन पर मुखरित और सजीव हो उठे , पवित्रता और स्वर्गिक आनंद से वह परिपूर्ण हो जाए क्योंकि जीवन में जो कुछ पवित्र  और धार्मिक है , स्त्रियाँ उसकी विशेष संरक्षिकाँए हैं. ध्यान रहे कि पुरुष जहाँ एक प्रेमल साथी , पत्नी चाहता है , वहाँ वह अपने लिए एक शांत , सुव्यवस्थित और सुंदर घर भी चाहता है. यहाँ वह हर ओर शोर- गुल , झगड़े- झँझट नहीं चाहता , यहाँ वह समस्याएँ पैदा करना नहीं चाहता , समस्याओं को हल करने का बल चाहता है. इसलिए अपने पति तथा पतिगृ्ह के अन्य लोगों के लिए एक सुखी, शांत और सुव्यवस्थित घर का निर्माण करना हर स्त्री का पुनीत कर्त्तव्य है.

संसार में तथा जीवन की लंबी यात्रा में एक नारी की जो कुछ करना है , वह पुत्री, बहिन, पत्नी और माता के पावन कर्त्तव्यों के अंतर्गत आ जाता है. जो लड़की इसे समझती है कि उसे समय- समय पर बेटी, बहिन , जीवन -संगिनी, दासी, रंभा- अप्सरा, मंत्री तथा माता सबके पार्ट अदा करने हैं, वही विवाहित जीवन में सफल होती है.हम चाहते हैं कि तुम्हारा दाम्पत्य जीवन सब प्रकार से सुखी और तुम्हारा सुहाग अमर हो . तुम्हारे सुख, सौभाग्य और सफलता के लिए हम सदैव कामना करते हैं.

इस शुभ अवसर पर तुम्हें अगणित सुंदर और अमूल्य वस्तुएँ उपहार - स्वरुप प्राप्त हुई होंगी मगर हम ' दीप- शिखा' नामक चित्रों सहित गीतों का यह संग्रह तुम्हें भेंट करते हैं.तुम इसे सहर्ष स्वीकार करो और सदैव प्रसन्नता के गीत गाती और उज्ज्वल भविष्य के सुंदर - सुंदर चित्र बनाती रहो.


हमारे अनेक आशीर्वाद

सावित्री देवी
साहित्य विशारद  ( 21- 2- 60 )


कन्हैयालाल
एम्0 ए0, एल्0  टी0. ( 21- 2- 60 )











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