Mahabhiyaan ( महाभियान ) by Sakhi Kendra || Part 5 || Swapnil Saundarya ezine

SWAPNIL   SAUNDARYA  e-zine  

( Vol- 05, Year - 2018, SPECIAL ISSUE  )

Presents

Mahabhiyaan ( महाभियान  ) by Sakhi Kendra 

Mega Campaign by Sakhi Kendra 

PART - V



खी केंद्र (Sakhi Kendra ) एवं महिला मंच ( Mahila Manch U.P ) उत्तर प्रदेश द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कानपुर में चलाए जा रहे महाभियान के अंतर्गत दिनाँक 13 मार्च 2018 को अहिराना 12/400 में शिकायती शिविर का आयोजन हुआ जिसमें सर्वाधिक समस्याएं दर्ज हुईं ,जहाँ  क्षेत्रीय पार्षद लक्ष्मी कोरी ( वार्ड नं0 4) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.



सखी केंद्र (Sakhi Kendra )की उपाध्यक्ष सुभाषिनी चतुर्वेदी ने बताया कि शहर में शिकायती शिविर का बहुत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है जिसमें  क्षेत्रीय पार्षद व महिला लीडर्स की सराहनीय भागीदारी  हो रही है. इस मौके पर शिकायती शिविर में 28 क्षेत्रीय समस्याएं दर्ज हुईं जिसमें पानी, आवास, सीवरेज, बिजली, सफाई, शौचालय, गंदगी  के अतिरिक्त 04 प्रापर्टी विवाद, 10 विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन, 09 राशन कार्ड , 06 घरेलू हिंसा, 02 पारिवारिक उत्पीड़न  , 01 छेड़्छाड़ एवं अन्य समस्याओं में शराब, जुआ खेलना, गंदगी आदि समस्याएं दर्ज हुईं.




इसके अलावा रामगढ़ मैदान अंजीत गंज में भी सुबह 11 बजे से भारी मात्रा में लोग अपनी शिकायतें दर्ज कराते रहे. यह एक मुस्लिम क्षेत्र था जिसमें महिलाओं को बहुत ही पर्दे में रहना पड़ता है, इसके बावजूद भी सैंकड़ों महिलाओं ने अपनी समस्याओं को पूर्ण साहस के साथ उजागर किया.





सखी केन्द्र (Sakhi Kendra ) द्वारा आयोजित दोनों शिविरों में हिंसा से संबंधित कुल 23 एवं क्षेत्रीय सम्स्याओं के लगभग 89 मामले देखे गए.

इस कार्यक्रम में मुख्य रुप से सुभाषिनी चतुर्वेदी ,पार्षद लक्ष्मी कोरी ,देवेंद्र बोरा,माया सिंह,अराधना रावत , संध्या शर्मा, मिथलेश, विजय लक्ष्मी , निर्मल , रीना वर्मा रुकमणी, शबाना बेगम, सबी, मधु  आदि  ने अपनी सहभागिता दी.





सखी केंद्र के महाभियान ( Mahabhiyaan by Sakhi Kendra )के अंतर्गत शिकायती शिविर के अतिरिक्त एक अन्य बेहद खूबसूरत अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मनाए जा रहे समारोह में सुश्री नीलम चतुर्वेदी जी  Neelam Chaturvedi ) , सिस्टर फिलो के साथ हमने ( स्वप्निल व ऋषभ ) शिरकत की. 










सोसायटी फॉर इम्पावरमेंट ऑफ विमेन, यूथ एण्ड चिल्ड्रेन फॉर  एक्शन ( Society for empowerment of Women , youth and children for action ) व मरियमपुर हाईस्कूल ( Mariampur High School )काकादेव कानपुर (Kanpur) द्वारा आयोजित इस बेमिसाल समारोह में बच्चों ने अपने अदभुत कौशल व कला का प्रदर्शन किया. महिलाओं ने भी लोक संगीत द्वारा समा बाँधा . समारोह में सिस्टर कृपा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई . नीलम जी ने वहाँ उपस्थ्ति बच्चों व महिलाओं के उत्साह व जोश की तारीफ करते हुए उन्हें अपने लिए आवाज़ बुलंद करने व स्वाभिमान से जीने की प्ररेणा दी. लड़्कों की शिक्षा के साथ साथ लड़्कियों को भी शिक्षित व स्वावलंबी होना कितना आवश्यक है ,इस पर नीलम चतुर्वेदी जी  Neelam Chaturvedi )  ने बारीकी से प्रकाश डाला. 





















महिलाओं  व बच्चों द्वारा लिखित स्लोगन्स ने भी हमारा ध्यान आकर्षित किया . 'तख़्त बदल दो ताज बदल दो ,हैवानों का राज बदल दो', 'आवाज़ दो हम एक हैं'......आदि स्लोगन्स द्वारा ही इनके हौसले व उत्साह का परिचय स्वत: ही मिल जाता है जो अत्यंत काबिले तारीफ है.













इसके उपरांत सिस्टर फिलो व सिस्टर कृपा के साथ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात हुई और संस्था में होने वाले अन्य कार्यक्रमों के बारे में उन्होंने हमें अवगत कराया. निश्चित रुप से हमारे लिए यह एक अविस्मरणीय अनुभव है जो हमारी ज़िंदगी के कुछ बेहतरीन लम्हों का हिस्सा बन गया है जिसके लिए नीलम चतुर्वेदी जी को हृदय से धन्यवाद जो उन्होंने हमें इस बेमिसाल समारोह का हिस्सा बनाया. 









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भारतीय समाज में स्त्री को देवी स्वरूप माना जाता है, उनकी पूजा की जाती है. परंतु  कटु सत्य यह है कि हमारे समाज में सदियों से स्त्री को हमेशा उपभोग की वस्तु ही माना गया है . कुछ लोगों की नीच, तुच्छ व संकीर्ण मानसिकता के कारण स्त्रियों को पूजना तो दूर समाज में उन्हें सम्मान तक प्राप्त नहीं हो पाता ..... ऐसे लोगों के लिये स्त्री मात्र पुरुषों की जरुरतें पूर्ण करने वाली मशीन है और उसका जिस्म खिलवाड़ करने की वस्तु.


हमारे देश भारत  में स्त्रियों के साथ बलात्कार के मामले प्रतिदिन सामने आते हैं. जो  स्त्री के अस्तित्व , उसकी स्वतंत्रता , अस्मिता , सुरक्षा व समाज में स्त्रियों के स्थान पर सवाल उठाते हैं. आए दिन होने वाली ऐसी वारदातों से हम अंदाज लगा सकते हैं कि हमारा समाज किस दिशा की ओर जा रहा है. समाज तो केवल मौन धारण किये हुए है. बलात्कार करने वाले यह नहीं देखता ना ही सोचता है कि उक्त महिला कौन से धर्म , जाति की है. ऐसी वारदातों को अंजाम देने वाले व्यक्ति अपनी हवस की आग में इतने पागल व अंधे हो जाते हैं कि उनमें दया, करुणा , इंसानियत , शर्म आदि भावनाओं का भी अंत हो जाता है . विकृ्त मानसिकता के ऐसे लोग प्रतिष्ठा व कद को ताक पर रख कर इस बात पर कतई ध्यान नहीं देते कि वे किस प्रकार का घृ्णित कार्य कर रहें हैं. अपनी हवस के आगे वे इस बात को भी भूल जाते हैं कि जिस स्त्री की इज़्ज़त को वे तार- तार कर रहे हैं, वैसी ही किसी स्त्री की कोख से उन्होंने भी जन्म लिया है. ऐसे घृ्णित लोगों के कारण हर रोज कहीं न कहीं इंसानियत शर्मसार होती रहती है.
वारदातें तो ऐसी भी सामने आईं कि लड़की के विरोध करने पर व बलात्कार में असफल होने पर दुराचारी कहीं लड़की की आँखें फोड़ देते हैं तो कहीं उन मासूमों की ज़िंदगी ही खत्म कर देते हैं.


बलात्कार की वारदातों में यह भी कड़वी सच्चाई प्राय: सामने आती है कि ज्यादातर महिलायें उनके साथ हो रहे शारीरिक शोषण के खिलाफ आवाज़ नही उठातीं , तो कभी परिवार की बदनामी के डर व पारिवरिक सदस्यों के दबाव में आकर , उनके साथ हो रहे अत्याचार को सहती रहती हैं और लोग उनकी इज़्ज़त से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आते हैं...... यदि स्थिति में सुधार न आया तो महिलाओं के साथ होने वाले ये दुराचार स्त्री अस्तित्व के लिये बेहद घातक व चिंताजनक हैं.


समय के बदलने के साथ-साथ भारतीय समाज , विकास और देश की तरक्की की ओर अग्रसस तो हुआ , लेकिन सामाजिक सोच अब भी वही घिसी पिटी बरकार है. हमारे देश की व्यवस्था व लोगों की संकुचित सोच का ही परिणाम है कि हमारे समाज में ज्यादातर स्त्रियाँ अकेले थाने में मुकदमा लिखाने नहीं जाती हैं. वो भय से भी मुकदमा लिखाने में डरती हैं और आज-कल तो हमारे समाज में एक ढर्रा और बन गया है कि मुकदमा लिखाने का मतलब समय और पैसे की बरबादी के अलावा और कुछ नहीं है. समाज में स्त्रियों के अस्मिता की रक्षा व उनकी स्थिति में सुधार तभी संभव है जब हमारा समाज उनके प्रति संवेदनशील बने. बेतुके स्त्री विरोधी रीति -रिवाज़ों , परंपराओं व संकीर्ण मानसिकता व विचारों का अंत हो . जब तक आडंबर, दिखावे व ढोंग से परे जमीनी ह्कीकत को ध्यान में रखते हुए कोई ठोस रणनीती, हमारे समाज में स्त्रियों की स्थिति , स्वतंत्रता व सुधार के लिये नहीं बनती तब तक  स्त्रियों को अपनी पह्चान , अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष करते रहना पड़ेगा. 




अंधेरा छटना ही चाहिये.....अंधेरा छटेगा ही.


                              

- ऋषभ शुक्ला ( Rishabh Shukla )

  संस्थापक -संपादक ( Founder-Editor )




Contact ::










Sakhi Kendra is a non profit charitable organization working for the empowerment of women, gender equity and gender justice with aims to build a healthy society.

Mission ::

Turning women into real strength  for themselves as well as for the entire society , through activism and alliance. To look upon the matter under persual of women human rights.

Goals ::

- To build a healthy society devoid of any discrimination against any gender, caste and religion.

- To empower women for sustainable social transformation through workshops, trainings and seminars.

- To help  the suppressed women live with dignity and self respect and to give them opportunity to flourish in their full bloom.



~The Face of Courage ~ 

Neelam Chaturvedi
Hon. General Secretary, Sakhi Kendra 







Neelam Chaturvedi is an Indian women’s human rights defender and activist.

She works to create awareness about gender and caste violence in India and build networks to combat violence against women. She seeks to increase women's ability to participate in democratic institutions through capacity building and promote rehabilitation and counselling services for street children and children involved in child labour. She founded the first women’s shelter in her region and campaigns against violence and sexual harassment of women in her community. Her work for women's rights has been highlighted by Amnesty International.

As a trade union activist in the 1970s she became involved in work on women’s issues within the trade union movement and in Indian society as a whole. She organised women workers to raise issues of physical and mental violence, the dowry system, rape, prostitution and sexual harassment.

She is the founder or co-founder of Indian women's organizations including Mahila Manch, Sakhi Kendra and the National Alliance of Women's Organisations.

She is a core member of the National Alliance of Women's Organisations (NAWO) and a leader of the Opposition (for the Democratic Party) in the NAWO's Indian Women’s Parliament.




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Swapnil Saundarya ezine : An Intro




Launched in June 2013, Swapnil Saundarya ezine has been the first exclusive lifestyle ezine from India available in Hindi language ( Except Guest Articles ) updated bi- monthly . We at Swapnil Saundarya ezine , endeavor to keep our readership in touch with all the areas of fashion , Beauty, Health and Fitness mantras, home decor, history recalls, Literature, Lifestyle, Society, Religion and many more. Swapnil Saundarya ezine encourages its readership to make their life just like their Dream World .




स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन - परिचय



 कला , साहित्य,  फ़ैशन व सौंदर्य को समर्पित भारत की पहली हिन्दी लाइफस्टाइल  ई- पत्रिका के पँचम चरण अर्थात पँचम वर्ष में आप सभी का स्वागत है . 

फ़ैशन व लाइफस्टाइल  से जुड़ी हर वो बात जो है हम सभी के लिये खास, पहुँचेगी आप तक , हर पल , हर वक़्त, जब तक स्वप्निल सौंदर्य के साथ हैं आप. गत वर्षों की सफलता और आप सभी पाठकों के अपार प्रेम व प्रोत्साहन  के बाद अब स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन  ( Swapnil Saundarya ezine )   के पँचम वर्ष को एक नई उमंग, जोश व लालित्य के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है ताकि आप अपनी ज़िंदगी को अपने सपनों की दुनिया बनाते रहें. सुंदर सपने देखते रहें और अपने हर सपने को साकार करते रहें .तो जुड़े रहिये 'स्वप्निल सौंदर्य' ब्लॉग व ई-ज़ीन  के साथ .

और ..............

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