Mahabhiyaan ( महाभियान ) by Sakhi Kendra || Part 6 || Swapnil Saundarya ezine

SWAPNIL   SAUNDARYA  e-zine  

( Vol- 05, Year - 2018, SPECIAL ISSUE  )

Presents

Mahabhiyaan ( महाभियान  ) by Sakhi Kendra 

Mega Campaign by Sakhi Kendra 

PART - VI












मैंने  उस चेहरे को देखा है , 
वो साहस का चेहरा .....
चेहरा ओज से भरा, 
चेहरा सूर्य की किरणों सा तेज ,
अपने आभा मण्डल में समेटे हुए.....
हिम्मत का प्रतीक वो चेहरा.
चेहरा निर्भीकता से संपूर्ण
चेहरा शक्ति से परिपूर्ण
चेहरा जिसमें  दिखा मुझे करुणा का सागर , 
वो चेहरा  जिसमें दिखी मुझे दृढ़्ता ..........
'अदरक वाली चाय ' की प्याली के साथ ......
मैंने चेहरे के पीछे की उस पराक्रम की गाथा को  जाना है , समझा है, देखा है ....
जी हाँ, मैंने साहस के चेहरे को देखा है.













खी केंद्र (Sakhi kendra ) द्वारा चलाए जा रहे महाभियान (Mahabhiyaan by Sakhi kendra ) के सातवें व आठवें दिन शिकायती शिविरों का आयोजन हुआ . दिनाँक 14 मार्च 2018  को नौबस्ता चौराहा, चरन सिंह कालोनी पार्क गोविंद नगर एवं प्राइमरी स्कूल के पास लोहारन का भटठा में शिविर लगाए गए जिसमें महिला हिंसा से संबंधित 46 मामले दर्ज हुए. 

सखी केंद्र (Sakhi kendra )की महामंत्री सुश्री नीलम चतुर्वेदी ( Ms Neelam Chaturvedi ) जी ने शिकायती शिविर में जाकर  यह महसूस किया कि महिलाएं अभी भी शिकायत करने से डरती हैं. 

चरन सिंह कॉलोनी में संपत्ति का मामला  होने के कारण  एक महिला को उसका खुद का बेटा जान से मारने के लिए घूम रहा है .इसी तरह से बहुत से केस सामने आए हैं जो बेहद गंभीर हैं, जिसके लिए सख़्त कारवाई की जाएगी.

दिनाँक 15 मार्च 2018 को काकादेव सर्वोदय नगर एवं परमिया अम्बेडकर बस्ती में शिकायती शिविर का आयोजन किया गया जिसमें तमाम महिलाओं ,युवाओं व बुजुर्गों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं कराईं.

सखी केंद्र की उपाध्यक्ष सुभाषिनी चतुर्वेदी जी ने बताया कि परमिया पुरवा अम्बेडकर बस्ती के शिविर में घरेलू हिंसा के 6 मामले, दहेज उत्पीड़्न के 2 मामले, प्रेम विवाद के 3 मामले ,संपत्ति विवाद के 4 मामले , छेड़छाड़ के 2 मामले एवं क्षेत्रीय समस्याओं के ज्यादा मामले दर्ज हुए जिसमें शौचालय निर्माण, पानी,बिजली, सड़्क, सीवरेज, नाली इत्यादी की समस्याएं शामिल हैं. इसके अलावा रोजगार से संबंधित 10, वृद्धा पेंशन से संबंधित 06 व विधवा पेंशन से संबंधित 05 शिकायतें दर्ज हुई जिसमें से 06 मामलों का तुरंत समाधान किया गया.













********************

पिछले  कुछ सालों में दुनिया भर में बलात्कार की घटनाओं में भयानक रुप से वृद्धि हुई है .जिस रेप-कल्चर को लगातार हमारे समाज में बढ़ावा मिल रहा है उसे स्त्रीवादी लेखकों की दिमागी उपज करार कर सिरे से ही नकार दिया गया है जो कि बिल्कुल ही गलत है. इस गंभीर मुद्दे को गहराई से समझने हेतु सरस्वती महिला महाविद्यालय ,कानपुर  की सहा0 प्रवक्ता ( गृह विज्ञान विभाग ) डॉ आकांक्षा अवस्थी के स्वप्निल सौंदर्य ईज़ीन में प्रकाशित लेख को आप सभी के साथ सांझा कर रहा हूँ.........


'समाज ' ये ऐसा शब्द है जिससे शायद ही कोई अपरिचित होगा अर्थात सभी जानते है समाज क्या है. हम समाज में व्याप्त बलात्कार जैसी नीच समस्या पर चर्चा करने से पहले समाज के मूल दो स्तंभों अर्थात स्त्री और पुरुष के विषय पर थोड़ा ध्यानाकर्षित करेंगे. पुरुष प्रधान समाज में जहाँ पुरुषों का वर्चस्व होता  है वहीं स्त्रियों की दशा आज भी  निंदनीय है. क्योंकि पुरुषों ने प्रत्येक स्त्री को अपने से निम्न व निचले तबके का मान लिया है जिसके परिणामस्वरुप देश भर में रेप कल्चर अर्थात  बलात्कार संस्कृति का प्रचलन सा होता दिख  रहा है .

पिछले  कुछ सालों में दुनिया भर में बलात्कार की घटनाओं में भयानक रुप से वृद्धि हुई है . जिस रेप-कल्चर को लगातार हमारे समाज में बढ़ावा मिल रहा है उसे स्त्रीवादी लेखकों की दिमागी उपज करार कर सिरे से ही नकार दिया गया है जो कि बिल्कुल ही गलत है.

किसी बलात्कार पीड़ित को उसके कपड़े, बलात्कार के समय, उसके रहन-सहन या किसी भी आधार पर दोषी ठहराना, लगातार पुरुषत्व को प्रधान व लैंगिक दॄष्टि से आक्रमक और स्त्रीत्व को विनम्र और लैंगिक दॄष्टि से निष्क्रिय के रुप में  घोषित करना, मान कर चलना की बेकायदा महिलाओं का ही बलात्कार होता है, महिलाओं को बलात्कार से बचने के अजीबो गरीब नुस्खे देना, यौन शोषण को सहनकर अपनी नियति मान लेना आदि. ये सभी रेप कल्चर के उदाहरण हैं.



मुझे समाज का यह रवैया समझ नहीं आता .एक औरत को  अपनी अहमियत , अपनी  जायज़ जगह के लिए आज भी संघर्ष क्यों करना पड़्ता है. एक पुरुष को जन्म देने वाली स्त्री स्वयं कैसे निर्बल , लाचार हो सकती है ? समाज की  इस दोहरी मानसिकता  में अब परिवर्तन लाना आवश्यक है. 

आखिर क्यों समाज में औरतों के लिए  अलग नियम व पुरुषों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं  जब प्रकृति ही  हमारे साथ पक्षपात नहीं करती. माँ जब बच्चे को जन्म देने वाली होती है  तब सृष्टि नायक बच्चे के जन्म प्रक्रिया में पक्षपात नहीं करता फिर भला ये समाज  कौन होता है स्त्री और पुरुष में पक्षपात करने वाला ?

पुरुषों को अपने शारीरिक बल ( मसल्स पावर) पर बहुत अभिमान होता है परंतु एक स्त्री किसी भी  स्तर पर पुरुषों से कम नहीं. हमारी सनातन संस्कृति में  माँ दुर्गा, काली, पार्वती,सीता, सती अनुसुइया और इतिहास के पन्नों में झाँसी की रानी, सरोजिनी नायडू, कल्पना चावला, आदि अनगिनत महिलाओं की अकूट क्षमता का प्रदर्शन हमारा समाज समय- समय पर देख चुका है परंतु अपने अहम की लड़ाई में ना जाने क्यों ये तंग मानसिकता के पुरुष  या सही शब्दों में कापुरुष  बार-बार महिलाओं की शक्ति पर सवाल उठाते हैं  ,उनका सम्मान भंग करने की कोशिश में  लगे रहते हैं.

लड़्कियों के पहनावे को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं. यदि किसी लड़्की के कपड़े छोटे या तंग होते हैं तो उस पर समाज बड़ी आसानी से  आरोप लगाने को तत्पर रहता है लेकिन जब किसी नवजात बच्ची से बलात्कार की घटनायें सामने आती हैं तब समाज का लड़्कियों के कपड़ों को उनके बलात्कार का कारण बताना खुद समाज की  संकीर्ण मानसिकता पर तमाचे जैसा है. 

बलात्कार को अपराध नियंत्रण कार्यक्रम के तहत नहीं रोका जा सकता है. बड़े ही कठोर हृदय से लिख रही  हूँ पर यह  कटु सत्य है  कि अब यह ( रेप )  हमारी संस्कृति का हिस्सा है और इससे सांस्कृतिक तौर पर ही निपटा जा सकता है, अपराध नियंत्रण की धाराएं और सख्ती एक समाधान है .... आख़िरी नहीं. विश्वास नहीं होता तो निम्न उदाहरणों पर गौर फरमायें , आप सभी को भी ज्ञात हो जाएगा कि कैसे रेप कल्चर आज तजी से हमारे देश में फैल चुका है.



एक सुप्रसिद्ध फिल्म की बात की जाए तो फिल्म के एक सीन में अभिनेत्री किसी जिम क्लास में एक्सरसाइज़ कर रही है और निर्देशक निहायती घटिया अंदाज से कैमरा अभिनेत्री के पिछले हिस्से पर बड़ी बारीकी से घुमाकर दिखाता है जिसे देख फिल्म का अभिनेता भी उसी अंदाज में कमर बड़े ही अश्लील अंदाज़ में घुमाकर अपने दोस्तों को बड़े चुटीले अंदाज में बताते हैं कि लड़कियां ये सब करती ही लड़कों के लिये हैं.

मैन विल बी मैन, हँसी तो फंसी, साली आधी घरवाली वाले जुमले क्या संदेश देते हैं ? बाजार में एक महिला के स्तनों के आकार का बना सिगरेट बुझाने वाला ऐस्ट्रे कैसे फनी क्रियेटिवटी के नाम पर बेचा जा सकता है? हमारे लिये बुरा ये है कि ऐसे प्रोडक्ट हाथों-हाथ बिक भी जाते हैं? एक स्कूल का अपने स्कूल के बच्चों की ड्रेस को लेकर इस विचारधारा के साथ सामने आना  कि स्कूल की ड्रेस अश्लील है जो न केवल बच्चों की मानसिकता को प्रभावित करेगी बल्कि पुरुषों को उकसाने का काम भी करेगी. ये कैसी मानसिकता वाले लोंगो का समाज में बोल-बाला है जिन्हें बच्चों के कपड़े तक उकसा सकते हैं. आलोचना के इन आधारों को कैसे इतनी आसानी से हमारे समाज में जगह मिल जाती है.

स्कूल, कॉलेज या ऑफिस का कोई भी ऐसा ग्रुप खोलिये जहाँ केवल लड़के हों. इनमें धड़ल्ले से भेजे विडियो और अधनंगी तस्वीरों पर नजर डालिये. अधिकांश आपको एमएमएस के नाम से मिलेंगे जो कि महिला की जानकारी के बिना बने रहते हैं. महिलाओं के शरीर पर किये जाने वाले भद्दे जोक्स बनाकर या आगे बढाकर क्या आप भी एक तरह से रेप कल्चर को बढ़ावा नहीं दे रहें हैं.





दिसंबर 2012 में दिल्ली के नृशंस बलात्कार और हत्याकांड ने पूरी दुनिया का ध्यान भारत में महिलाओं की असुरक्षा की ओर खींचा था. निर्भया कांड के बाद महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और पीछा करने जैसी हरकतों को अपराध की श्रेणी में लाया गया और बलात्कार के मामलों में पुलिस की तेज कार्रवाई, कोर्ट में त्वरित सुनवाई और पीड़िता के कष्ट को और ना बढ़ाने वाले तमाम उपाय लाए गए. लेकिन इससे भी बलात्कार की घटनाओं में कमी नहीं आई. निर्भया के पहले और उसके बाद कितने ही ऐसे दिल दहलाने वाले मामले सामने आ चुके हैं. यूपी के बंदायूं में पेड़ से लटकी मिली किशोरियों की लाशें हों, या  छत्तीगढ़ के कोरबा जिले के आदिवासी छात्रावास में छात्राओं के साथ कथित यौन शोषण और दुष्कर्म की वारदात जिसमें भी टुकटुकी मामले की ही तरह कुछ स्थानीय नेताओं और पत्रकारों का नाम उछला था. 

ऐसी आपराधिक घटनाएं जिसमें छोटी बच्चियों तक को निशाना बनाया जा रहा है, हिंदू-मुसलमान द्वेष को बढ़ावा देने और राजनीतिक फायदे के लिए सांप्रदायिक मोड़ देने की नहीं बल्कि एकजुट होकर दोषियों को दबोचने की कोशिश का मौका होना चाहिए.


डॉ आकांक्षा अवस्थी
सहा0 प्रवक्ता  ( गृह विज्ञान विभाग )
सरस्वती महिला महाविद्यालय 



अंधेरा छटना ही चाहिये.....अंधेरा छटेगा ही.



                                    प्रस्तुतकर्ता:   

- ऋषभ शुक्ला ( Rishabh Shukla )


  संस्थापक -संपादक ( Founder-Editor )






Contact ::














Story Behind Sakhi Kendra .......................

The incidents of women violence and women human rights along with criminal activities have been addressed more effectively through police department which has become more functional, active and responding through our interventions and continuous advocacies. 
People from several districts of various States have also approached our helpline and have also taken the benefits of our support services on account of its goodwill through email, phone and postage. 

The intellectual s from various spheres have always been involved with our endeavors through their valuable inputs, and suggestions during ' Think Tank Meetings ' organized frequently .When they had done the review of the work done by Sakhi Kendra  in the past 37 years they expressed their realizations and feeling of appreciation from the bottom of their heart for our passionate, devoted work to achieve our goal.

Several social and women organizations of U.P. and India have been in continuous networking with our organization like Sangini of M.P., Chattisgarh Mahila Samakhya, Todang Trust, Jharkhand, Gadhwal Sewa Samiti, Uttrakhand, HELP Foundation, SARC-Varanasi, Gramya-Varanasi, CREA of Delhi, SABLA of Raibareilly,PANI Sansthan-Gorakhpur, HUMSAFAR of Lucknow, VANANGANA of Chitrakoot, MAHILA UTHAN SAMITI of Lalganj,MEET of Auraiya, BAL VIKAS SAMITI of Fatehpur and CREDA of Mirzapur, Veerangana-Jhansi etc. has been proved an important tool to take several cases in the process of justice.
The emerging women human rights defenders from Kanpur district & rural and different districts of U.P. have been helpful in establishing links with more villages and slums take initiative at primary level to deal with the challenging situation. 



Sakhi Kendra is a non profit charitable organization working for the empowerment of women, gender equity and gender justice with aims to build a healthy society.



Mission ::

Turning women into real strength  for themselves as well as for the entire society , through activism and alliance. To look upon the matter under persual of women human rights.

Goals ::

- To build a healthy society devoid of any discrimination against any gender, caste and religion.

- To empower women for sustainable social transformation through workshops, trainings and seminars.

- To help  the suppressed women live with dignity and self respect and to give them opportunity to flourish in their full bloom.



~The Face of Courage ~ 

Neelam Chaturvedi
Hon. General Secretary, Sakhi Kendra 






Neelam Chaturvedi is an Indian women’s human rights defender and activist.

She works to create awareness about gender and caste violence in India and build networks to combat violence against women. She seeks to increase women's ability to participate in democratic institutions through capacity building and promote rehabilitation and counselling services for street children and children involved in child labour. She founded the first women’s shelter in her region and campaigns against violence and sexual harassment of women in her community. Her work for women's rights has been highlighted by Amnesty International.

As a trade union activist in the 1970s she became involved in work on women’s issues within the trade union movement and in Indian society as a whole. She organised women workers to raise issues of physical and mental violence, the dowry system, rape, prostitution and sexual harassment.

She is the founder or co-founder of Indian women's organizations including Mahila Manch, Sakhi Kendra and the National Alliance of Women's Organisations.

She is a core member of the National Alliance of Women's Organisations (NAWO) and a leader of the Opposition (for the Democratic Party) in the NAWO's Indian Women’s Parliament.



Awards

Representatives and founder of SAKHI KENDRA have been honored and awarded hundred times. For example Ms. Neelam Chaturvedi was invited by Amnesty International U.S. and Canada as a guest speaker and also honored by Rotary International club.

All India Intellectual Forum gave her the title of ‘Kanpur Ratna’ & honored with memento and certificate for incredible contribution of Neelam Chaturvedi as a Women human right defender and social worker. B.N.S. D. College, PSIT (college of professional studies) , at golden jubilee G.S.V.M. medical college, Kanpur, Saraswati Vidya Mandir Higher Secondary School, Rambagh , Kanpur and Rastrawadi Parivartan Manch‘ also felicitated her for enormous contribution to society.

She is also honored with ’ Indira Priyadarshini Award -2013 ' for her incredible contribution to Social reform.



























************************


Swapnil Saundarya ezine : An Intro



Launched in June 2013, Swapnil Saundarya ezine has been the first exclusive lifestyle ezine from India available in Hindi language ( Except Guest Articles ) updated bi- monthly . We at Swapnil Saundarya ezine , endeavor to keep our readership in touch with all the areas of fashion , Beauty, Health and Fitness mantras, home decor, history recalls, Literature, Lifestyle, Society, Religion and many more. Swapnil Saundarya ezine encourages its readership to make their life just like their Dream World .




स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन - परिचय



 कला , साहित्य,  फ़ैशन व सौंदर्य को समर्पित भारत की पहली हिन्दी लाइफस्टाइल  ई- पत्रिका के पँचम चरण अर्थात पँचम वर्ष में आप सभी का स्वागत है . 

फ़ैशन व लाइफस्टाइल  से जुड़ी हर वो बात जो है हम सभी के लिये खास, पहुँचेगी आप तक , हर पल , हर वक़्त, जब तक स्वप्निल सौंदर्य के साथ हैं आप. गत वर्षों की सफलता और आप सभी पाठकों के अपार प्रेम व प्रोत्साहन  के बाद अब स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन  ( Swapnil Saundarya ezine )   के पँचम वर्ष को एक नई उमंग, जोश व लालित्य के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है ताकि आप अपनी ज़िंदगी को अपने सपनों की दुनिया बनाते रहें. सुंदर सपने देखते रहें और अपने हर सपने को साकार करते रहें .तो जुड़े रहिये 'स्वप्निल सौंदर्य' ब्लॉग व ई-ज़ीन  के साथ .

और ..............

बनायें अपनी ज़िंदगी को अपने सपनों की दुनिया .
( Make your Life just like your Dream World ) 


Founder - Editor  ( संस्थापक - संपादक ) :  
Rishabh Shukla  ( ऋषभ शुक्ला )

Managing Editor (कार्यकारी संपादक) :  
Suman Tripathi (सुमन त्रिपाठी) 

Chief  Writer (मुख्य लेखिका ) :  
Swapnil Shukla (स्वप्निल शुक्ला )

Art Director ( कला निदेशक) : 
Amit Chauhan  (अमित चौहान) 

Marketing Head ( मार्केटिंग प्रमुख ) : 
Vipul Bajpai (विपुल बाजपई) 


'स्वप्निल सौंदर्य - ई ज़ीन ' ( Swapnil Saundarya ezine )  में पूर्णतया मौलिक, अप्रकाशित लेखों को ही कॉपीराइट बेस पर स्वीकार किया जाता है . किसी भी बेनाम लेख/ योगदान पर हमारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं होगी . जब तक कि खासतौर से कोई निर्देश न दिया गया हो , सभी फोटोग्राफ्स व चित्र केवल रेखांकित उद्देश्य से ही इस्तेमाल किए जाते हैं . लेख में दिए गए विचार लेखक के अपने हैं , उस पर संपादक की सहमति हो , यह आवश्यक नहीं है. हालांकि संपादक प्रकाशित विवरण को पूरी तरह से जाँच- परख कर ही प्रकाशित करते हैं, फिर भी उसकी शत- प्रतिशत की ज़िम्मेदारी उनकी नहीं है . प्रोड्क्टस , प्रोडक्ट्स से संबंधित जानकारियाँ, फोटोग्राफ्स, चित्र , इलस्ट्रेशन आदि के लिए ' स्वप्निल सौंदर्य - ई ज़ीन ' को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता .

कॉपीराइट : 'स्वप्निल सौंदर्य - ई ज़ीन '   ( Swapnil Saundarya ezine )   के कॉपीराइट सुरक्षित हैं और इसके सभी अधिकार आरक्षित हैं . इसमें प्रकाशित किसी भी विवरण को कॉपीराइट धारक से लिखित अनुमति प्राप्त किए बिना आंशिक या संपूर्ण रुप से पुन: प्रकाशित करना , सुधारकर  संग्रहित करना या किसी भी रुप या अर्थ में अनुवादित करके इलेक्ट्रॉनिक या यांत्रिक , प्रतिलिपि, रिकॉर्डिंग करना या दुनिया के किसी भी हिस्से में प्रकाशित करना निषेध है . 'स्वप्निल सौंदर्य - ई ज़ीन ' के सर्वाधिकार ' ऋषभ शुक्ल' ( Rishabh Shukla )  के पास सुरक्षित हैं . इसका किसी भी प्रकार से पुन: प्रकाशन निषेध है.

चेतावनी : 'स्वप्निल सौंदर्य - ई ज़ीन '  ( Swapnil Saundarya ezine )   में घरेलु नुस्खे, सौंदर्य निखार के लिए टिप्स एवं विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के संबंध में तथ्यपूर्ण जानकारी देने की हमने पूरी सावधानी बरती है . फिर भी पाठकों को चेतावनी दी जाती है कि अपने वैद्य या चिकित्सक आदि की सलाह से औषधि लें , क्योंकि बच्चों , बड़ों और कमज़ोर व्यक्तियों की शारीरिक शक्ति अलग अलग होती है , जिससे दवा की मात्रा क्षमता के अनुसार निर्धारित करना जरुरी है.  











SWAPNIL SAUNDARYA LABEL 
Make your Life just like your Dream World !






copyright©2013-Present. Rishabh Shukla. All rights reserved

No part of this publication may be reproduced , stored in a  retrieval system or transmitted , in any form or by any means, electronic, mechanical, photocopying, recording or otherwise, without the prior permission of the copyright owner. 

Copyright infringement is never intended, if I published some of your work, and you feel I didn't credited properly, or you want me to remove it, please let me know and I'll do it immediately. 


Comments

Popular posts from this blog

मेहंदी स्पेशल { Mehendi Special }

Akka Mahadevi, a woman who defied a king and walked naked out of her devotion to the Shiva .

Mahabhiyaan ( महाभियान ) by Sakhi Kendra || Part 5 || Swapnil Saundarya ezine